Monday, 8 February 2016

पहले चरण में 20 शहर बनेंगे स्मार्ट


मोदी सरकार की बहुचर्चित योजना 'स्मार्ट सिटी' के पहले चरण में बनने वाले 20 शहरों के नामो की घोसना कर दी गयी है। रैंकिंग में भुबनेश्वर को पहला जबकि भोपाल को आखिरी,यानी 20 वें नंबर पर जगह मिली है। शहरी विकास मंत्री एम वेंकैया नायडू ने कहा कि इन शहरो पर आने वालो 5 वर्षो में 50 हजार करोड़ की राशि खर्च की जायगी। चुने गए प्रत्येक शहर को भारत सरकार 3 वर्षों तक  100-100 करोड़ रुपये देगी। उन्होंने बताया कि पहले फेज़ में 20 शहरों को शामिल किया गया है ,अगले दो साल बाद 40 और फिर दो साल बाद 40 शहरों को चुनकर स्मार्ट सिटी के तोर पर विकसित किया जायगा।

#कौन - कौन सिटी बनेंगे 'स्मार्ट'
मोदी सरकार ने पहले चरण में भुब्नेश्वर,पुणे,जयपुर,सूरत,कोच्ची,अहमदाबाद,जबलपुर,विशाखापटटनम,शोलापुर,दावणगिरी,इन्दोरे,नई दिल्ली,कोयंबटूर,काकीनाडा,बेलागवी,चेन्नई,लुधियाना और भोपाल को स्मार्ट बनाने बीड़ा उठाया है।  स्मार्ट सिटी की पहली लिस्ट में देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश समेत बिहार,झारखण्ड,पश्चिम बंगाल,छतीशगढ,हिमाचल और हरयाणा के किसी भी शहर को शामिल नहीं  किया गया है। लिस्ट में 5 राज्यों की राजधानी,भुवनेस्वर(ओडिशा),भोपाल(मध्यप्रदेश),जयपुर(राजस्थान),चेन्नई(तमिलनाडु) और गुवाहाटी (असम) शामिल है। गौर करने वाली बात है,लिस्ट में प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी का नाम नदारद है,जबकि देश के 17 राज्यों की किसी भी शहर को इस लिस्ट में जगह नहीं दी गई है.

#किस आधार पर हुआ शहरों का चयन
शहरों को स्मार्ट बनाने के लिए केन्द्र ने सभी राज्यों से शहरों की सूचि मांगी थी। जिसे वरीयता के आधार पर 'स्मार्ट सिटी' के तोर पर विकसित करना था। राज्यों से आयी सूचि क बाद कुल 97 शहरो को स्मार्ट बनाने के लिए तीन समयावधि तय की गई। पहले फेज़ में 20  शहरों को,बाकी बचे 77 शहरों को दो और चरणो में विकसित किया जाना है। इन सभी शहरो की वरीयता का चुनाव त्रिस्तरीय स्वतंत्र  कमिटी द्वारा किया जा रहा है।शहरों की चयन का पैमाना उसकी मौजूदा स्थिति को रखा गया है. सभी शहरों को 2020 तक विकसित करने लक्ष्य है।

#केसा होगा स्मार्ट शहर
आमतौर पर स्मार्ट हम उसे कहते हैं, जो हर दृष्टिकोण से बहेतर हो, जिसमे लोगो की नजरों को अपनी और आकर्षित करने की सुंदरता हो, जो हर तरह से औरों से बेहतर हो। लेकिन बात जब स्मार्ट सिटी की हो, तो इसकी सरचना,बसावट,बनावट व जरूरत स्थल समाज और शहर के अनुसार अलग-अलग हो सकते है। लेकिन तमाम शहरो को स्मार्ट बनाने की कुछ सामान्य जरूरतें हैं।
मसलन,  जब बात  स्मार्ट सिटी की होती है तो हमारी कल्पना में एक ऐसे शहर का निर्माण होता है, जहां पहुचने की सुगम व्यवस्था के साथ - साथ आंतरिक कॉलोनी संपर्क बेहतर हो,बिजली की निर्बाध 24 घंटे आपूर्ति हो। घर-घर पेय जल की व्यवस्था हो , लम्बी अवधि को ध्यान रखकर बनाया गया सिवरेज सिस्टम हो। कचड़ा का ठोस प्रबंध हो, क्योकि वर्तमान समय में किसी  भी शहर की बदसूरती का मुख्य कारण वहां से निकलने वाली गंदगी का समुचित निवारण न होना है।
स्मार्ट सिटी कल्पना को एक ऐशे शहर की और ले जाती है,जहां स्वास्थ्य की सम्पूर्ण ववस्व्था हो। छात्रों को उच्च शिछा हासिल करने के लिए किसी दूसरे शहर न जाना पड़े। युवाओ को रोजगार शहर के अंदर ही उपलब्ध हो। जिस शहर में मानव जीवन को आसान बनाने वाली तमाम चीजे उपलब्ध हो। शहर भर में वाई -फाई की सेवा हो,सारे काम ऑन-लाइन हो,मतलब पेपरलेस कार्यालय हो। एक ऐसा शहर जो हर लोगो की जरूरत व सुगमता का ख्याल रखता हो,जहां शिक्षा,स्वस्थ्य समेत तमाम जरुरी चीजों के अलावा मनोरंजन की भी सारी सुविधाए उपलब्ध हों।

#कठिन है डगर स्मार्ट सिटी की
सिर्फ शहरों की सरचना,बनावट,बसावट व उसमें चमक-दमक वाली कुछ सुविधायें शुरू कर देने से शहर स्मार्ट नही हो जाएंगे। शहरो को विकसित करने से पहले चाहिए की वहा के लोगो की साक्षरता को बढाया जाए। जब लोग साक्षर होंगे,तभी जागरूक होंगे ,व स्मार्ट सिटी की सुविधाओं का बेहतर लाभ उठा पाएंगे। जब तक लोगों की सोच नहीं विकसित होगी,लोग स्मार्ट नही होंगे तब तक स्मार्ट सिटी की अवधारणा का पूर्णत: सफल होना संदेह पैदा करता है।