Wednesday, 26 August 2015

राजनीति की मर्यादा को न गिराये दल


राजनीति का खेल भी निराला है,यहां सब जायज है.इसमें न तो दोस्ती पक्की होती है और न ही दुश्मनी स्थायी.भरतीय राजनीति के रंग ही कुछ ऐसे हैं,जिस पार्टी को चुनाव प्रचार में सबसे भ्रष्ट बताया उसी से चुनाव परिणाम बाद सत्ता खातिर गठजोड़ कर ली.सत्ता पाने की भूख हमारे राजनीतिक दलों में इतनी है कि ये लोग किसी भी दस्तरखान पर आसन लगाने में नहीं हिचकते.
लगभग जितने भी राजनीतिक दल हैं,उनका पहला और प्राथमिक उदेश्य होता है किसी भी तरह गद्दी हासिल की जाये.राजनीतिक दलों की सारी आदर्श बातें चुनाव प्रचार तक ही सीमित रहती हैं,इसके बाद ये लोग आम जनों के विश्वास को हलाल करने में भी गुरेज नहीं करते.इन लोगों के लिये मर्यादा व विचारधारा कोई मायने नहीं रखती.इतिहास इन चीजों का कई बार गवाह बना है.फिर बात 2013 के दिल्ली विधान सभा चुनाव की हो या पिछले साल हुये जम्मूकश्मीर विधानसभा के चुनाव का अथवा बिहार की राजनीति का महगठ्बन्धन इसमें राजनीतिक दलों ने जिस तरह से राजनीति की सारी विचारधारा को तार-तार करते हुये एक दूसरे से हाथ मिलाया इसके बाद इस सम्बन्ध में बहुत कुछ कहने की ज़रूरत नहीं है....और वैसे भी ये उदाहरण तो सिर्फ एक बानगी हैं,ऐसे विश्वास परस्त राजनीति के बहुसंख्य उदाहरण हैं.राजनीतिक दलों की सत्ता पाने हेतु किसी भी हद से गुजरने वाली जज्बा ने जनता के विश्वास,अरमान व सपने की कई बार बलि दी है.
हमारे स्वतंत्रता सैनानियों ने हमें आज़ादी दिलायी राष्ट्र के नवनिर्माण के लिये,जहां प्रत्येक नागरिक का स्वाभिमान हो किसी भी रुप में किसी के अधिकार का अतिक्रमण न हों लेकिन,आज हमें अपनी आजादी पर ही शंका होती है.क्या हम वास्तविक रुप में आजाद हैं?
क्या हम सभी स्वभिमान सहित जिंदगी जीतें हैं?या फिर यह आजादी हमें सिर्फ सत्ता के बदलाव के रूप में मिली है.पहले अंगरेज़ हम पर छलनीति से राज़ करते थे और आज़ वही काम हमारे राजनीतिक दल कर रहें हैं.अगर राजनीतिक दल लोकतंत्र की बुनियाद जनता के प्रति ही उत्तरदायी नहीं होंगे तो इसे क्या कहेंगे?राजनीति!या छलनीति
धन्यवाद!
आपका विचारक:नयन

Saturday, 22 August 2015

चुनावी जुमला या नयी राजनीति की शुरुवात......


मोदी सरकार ने बिहार को 1.65 लाख करोड़ का विशेष आर्थिक पेकेज देकर राजनीति के बिसात पर बहुत बड़ा दांव खेला है.बिहार विधानसभा का चुनाव आगामी अक्टुबर -नवम्बर महीने में होने वाले हैं,जिसे देखते हुये इस विशेष आर्थिक पेकेज को राजनीतिक महकमे में सियासी चाल की संज्ञा दी जा रही है.तमाम विपक्षी पार्टी इसे बिहार की जनता को लुभाने का हथकण्डा बता रही.विपक्ष का कहना है कि चुनाव आते ही प्रधानमंत्री किसी खास जगह पर केंद्रीत हो जाते हैं जो कि प्रधानमंत्री की पद की गरिमा के खिलाफ है.महगठ्बन्धन के नेताओं का कहना है कि बीते 15 महीने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार की एक भी यात्रा नहीं की लेकिन,चुनाव आते ही मोदी ने बिहार में डेरा डालना शुरू कर दिया.यह तुष्टीकरण की राजनीति को प्रदर्शित करता है.विपक्ष के आरोपों पर गौर करें तो यह एक हद तक जायज भी है.सत्तासीन होने के बाद मोदी ने एक बार भी बिहार का दौरा नहीं किया और न ही उन्होने बिहार की भविष्य योजनाओं के ऊपर कोई उच्च स्तरीय चर्चा की जबकि पिछले लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान मोदी बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की बात कह चूके हैं.ऐसे में सवाल उठना लाज़मी है.हालाँकि.प्रधानमंत्री का हर सभा में हर जगह विकाश योजनाओं पर चर्चा करना निहायत ही सुंदर राजनीति के लिये अच्छा संकेत है.कम से कम बात विकाश की हो तो रही......
चुनाव प्रचार को जाति,धर्म व मज़हब से अलग तो किया जा रहा......यह नयी राजनीति के लिये शुभ है.
लेकिन,अगर मोदी सरकार की यह घोषणा चुनाव परिणाम पर निर्भर करती है तो यह दुर्भाग्यपूर्ण होगा !
अगर प्रधानमंत्री ने सही मायने में विकसित बिहार की कल्पना की है तो चुनाव परिणाम कुछ भी हों,बिहार की गद्दी पर शासन चाहे जिस भी दल का हो,पेकेज की राशि बिहार सरकार को समय दर समय मिलें.यह नयी राजनीति की परिभाषा होगी पर पहले की कुछ घोषणाओं की तरह अगर यह भी महज चुनावी जुमला साबित हुआ तो यह भरतीय जनता पार्टी के पतन के कारणों में से एक हो सकता है.
आपका विचारक:नयन
धन्यवाद !!!   

Wednesday, 19 August 2015

देश के प्रति ईमानदार रहें हम


स्वतंत्रा दिवस की 69 वी सालगिरह पर सभी देशवासियो को ढेर सारी शुभकामनायें.आज क दिन सभी देशवासियों के लिये बेहद खास है.आज के दिन ही हम गुलामी की जंजीर से आजाद हुये,और अपने देश पर अपने लोगों का राजनीति उन्मुख हुआ.आज का दिन उन वीर सपूतों के सोच,विचार,समर्पण और शहादत को यद करने का दिन है,जिसके फलस्वरूप आज हम आजाद हैं.हमारे स्वतंत्रता सैनानियो ने अखंड,सम्प्रभुत्व,शिक्षित और अतुलनीय भारत की परिकल्पना के लिये आजादी की लड़ाई लरी.उन राष्ट्र प्रणेताओ की सोच अद्वितीय भारत बनाने की थी जिसके लिये उनलोगों ने सबसे पहले देश को क्रूर शासन से अलग किया.
हम आजाद हुये.राष्ट्र पर अपने लोगों का रज हुआ.भारत प्रगति कि लकीर खुद के हाथों से गढ़ने लगा.लेकिन,गुजरते समय के साथ लोगों मे राष्ट्र भक्ति की भावना कमजोर पड़ने लगी और आज राष्ट्र उस मुहाने पर खड़ा है,जहां देश भक्ति की भावना लगभग मलिन पर गयी है.भ्रष्टाचार से हमारा देश पूर्व समय से ही ग्रसित है.सामंतवाद की नीति दिन व दिन बढ़ती जा रही है.साम्प्रदायिकता की हवा आज भी चलती है.अगर इन मुद्दों पर गौर करे तो हम पाते हैं की इनके पीछे एक बड़ा कारण-लोगों में देश भक्ति की भावना का कमना है.देश के सभी लोग अगर राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों को समझ ले तो भ्रष्टाचार,सामंतवाद और सम्प्रदायिकता की कुरीति स्वतः ख़त्म हो जायेगी.ज़रूरत है,लोगों को शिक्षित,जागरूक और  राष्ट्र के प्रति अपनी कर्तव्यों का बोध कराने की.अगर वर्तमान समय में इस और ध्यान नहीं दिया गया तो भविष्य-स्वार्थी,मौकापरस्ती व छोटे बड़े  की खाई को बढ़ाने वाला होगा.
स्वतंत्रता आंदोलन के प्रणेताओं को याद करने का सबसे अच्छा तरीका है कि-हम अपने अंदर राष्ट्र भक्ति की भावना को सदैव जीवंत रखें.
आपका विचारक: नयन
जय हिंद! जय भारत! 

हम स्वार्थी तो नहीं हो रहें.......


स्वतंत्रा दिवस की 69 वी सालगिरह पर सभी देशवासियो को ढेर सारी शुभकामनायें.आज क दिन सभी देशवासियों के लिये बेहद खास है.आज के दिन ही हम गुलामी की जंजीर से आजाद हुये,और अपने देश पर अपने लोगों का राजनीति उन्मुख हुआ.आज का दिन उन वीर सपूतों के सोच,विचार,समर्पण और शहादत को यद करने का दिन है,जिसके फलस्वरूप आज हम आजाद हैं.हमारे स्वतंत्रता सैनानियो ने अखंड,सम्प्रभुत्व,शिक्षित और अतुलनीय भारत की परिकल्पना के लिये आजादी की लड़ाई लरी.उन राष्ट्र प्रणेताओ की सोच अद्वितीय भारत बनाने की थी जिसके लिये उनलोगों ने सबसे पहले देश को क्रूर शासन से अलग किया.
हम आजाद हुये.राष्ट्र पर अपने लोगों का रज हुआ.भारत प्रगति कि लकीर खुद के हाथों से गढ़ने लगा.लेकिन,गुजरते समय के साथ लोगों मे राष्ट्र भक्ति की भावना कमजोर पड़ने लगी और आज राष्ट्र उस मुहाने पर खड़ा है,जहां देश भक्ति की भावना लगभग मलिन पर गयी है.भ्रष्टाचार से हमारा देश पूर्व समय से ही ग्रसित है.सामंतवाद की नीति दिन व दिन बढ़ती जा रही है.साम्प्रदायिकता की हवा आज भी चलती है.अगर इन मुद्दों पर गौर करे तो हम पाते हैं की इनके पीछे एक बड़ा कारण-लोगों में देश भक्ति की भावना का कमना है.देश के सभी लोग अगर राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों को समझ ले तो भ्रष्टाचार,सामंतवाद और सम्प्रदायिकता की कुरीति स्वतः ख़त्म हो जायेगी.ज़रूरत है,लोगों को शिक्षित,जागरूक और  राष्ट्र के प्रति अपनी कर्तव्यों का बोध कराने की.अगर वर्तमान समय में इस और ध्यान नहीं दिया गया तो भविष्य-स्वार्थी,मौकापरस्ती व छोटे बड़े  की खाई को बढ़ाने वाला होगा.
स्वतंत्रता आंदोलन के प्रणेताओं को याद करने का सबसे अच्छा तरीका है कि-हम अपने अंदर राष्ट्र भक्ति की भावना को सदैव जीवंत रखें.
आपका विचारक: नयन
जय हिंद! जय भारत!