Wednesday, 2 September 2015

समाज के दर्जी हैं शिक्षक


सितम्बर महीने के आते ही स्कूल,कॉलेज व अन्य शैक्षणिक संस्थानों के छात्रों में विशेष तैयारियों का दौर शुरू हो जाता है.हो भी क्यों न हम प्रत्येक वर्ष 5 सितम्बर को शिक्षक दिवस के पवित्र पावन के रुप में जो मानते हैं.छात्र-छात्रओं के जीवन में शिक्षक का स्थान काफी ऊँचा है.समाज का हर व्यक्ति किसी न किसी रुप में छात्र होता है,इसलिए शिक्षक दिवस के इस निर्मल पावन की महत्ता स्वयं ही बढ़ जाती है.भरतीय संस्कृति में गुरु का स्थान देव से भी ऊँचा रखा गया है,इस बात का वर्णन कई धर्म ग्रंथों में मिलता है,गुरुड़ ब्रह्म,गुरूड़ विष्णु...या गुरू गोविंद दौऊ खड़े...आदि पंक्तियों में गुरू की महिमा का वर्णन बखूबी मिलता है.
भारत एक दिव्य अनुशासित राष्ट्र है.यहां हर अच्छी चीजों को समाज में आला दर्जा दिया जाता है.यहां के कण-कण में आदर का भाव वशीभूत है.यह राष्ट्र व्यक्ति मात्र के लिये कृतज्ञता जाहिर करता है,ये हमारे देश का संस्कार है.शिक्षक दिवस भी इसी का एक नमूना है.भारत के पूर्व राष्ट्रपति,महान शिक्षाविद व उससे भी बड़े दार्शनिक डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन के प्रति कृतज्ञता अर्पित करने के लिये राष्ट्र प्रति वर्ष उनके जन्म दिवस 5 सितम्बर को शिक्षक दिवस के रुप में मनाता है.शिक्षक दिवस का दिन डॉक्टर राधाकृष्णन के राष्ट्र के प्रति योगदान के साथ-साथ विश्व के उन तमाम गुरुओं को नमन करने का दिन है जिसने गुरु शब्द की सार्थकता को हर परिस्थिति में सिद्ध किया है.गुरु शब्द का संयोजन दो अक्षरों से मिलकर होता है-गु और रु.
गु मतलब अज्ञान रूपी अंधकार व रु मतलब ज्ञान रूपी प्रकाश अर्थात गुरु वह है-जो हमें अज्ञान रूपी अंधकार से ज्ञान रूपी प्रकाश की ओर ले जायें.शिक्षक दिवस कई मायने में हमें बहुत कुछ सिखाता है,जिसमें समाज को बदलने का माद्दा है.अगर हम अपने जीवन के हर समय में सीखने की ललक रखने वाले एक छात्र व विनम्रता के स्मारक गुरु को जीवित रखें तो यह जीवंतता समाज सुधारक हो सकती है,दिव्य व समृद्ध समाज का निर्माणकर्ता हो सकती है.
एक बार पुनः विश्व के तमाम शिक्षकों को नत मस्तक नमन!गुरु का समाज के प्रति योगदान नि:शब्द है,इनके बहुमूल्य समाजिक योगदान का संसार कर्जदार है.
आपका विचारक:नयन
धन्यवाद!!!

No comments:

Post a Comment