Friday, 18 September 2015

हमें अपनी शक्ति पहचाननी होगी


भारत कालांतर में शिक्षा का विश्व में सबसे बड़ा केन्द्र रहा है.यहां अनेकों ज्ञानी पुरुष हुए जिन्होंने विश्व समाज को अँधेरे से प्रकाश की ओर चलने का मार्ग बताया.महात्मा बुद्ध,गुरुनानक,ऋशभदेव,तुलसीदास,कालीदास,गुरु गोविंद सिंह,वाल्मीकि,पाणिनि,रामकृष्ण परमहंस व विवेकानंद जैसे देव तुल्य आत्माओ ने विश्व को शांति,आध्यात्म,समरसता तथा जीवन की परिभाषा से सम्पूर्ण जगत को अवगत कराया.इन अलौकिक मानवों की वजह से भारत ने सारे जगत में ज्ञान भूमि का दर्जा पाया.हमारा सिक्का सोलहों दिशाओं में बजता था.हमारी कही गई हर एक बात ब्रह्म लकीर होती थीं.हम सम्पूर्ण विश्व को शिक्षित करते थे.यहां दुनिया के लगभग हर कोने से लोग दीक्षा हासिल करने आते थे.लेकिन कहते हैं,समय बलवान होता है.आखिर ऐसा किया हुआ कि हम वाचक से याचक बन गए.सवाल बड़ा मार्मिक है कि वक्त ने ऐसी कौन सी करवट ली की हम अपनी पहचान ही भूल गए.और यह भूल ऐसी की हमने इसे वर्षों तक याद ही नहीं किया.परिणाम सामने है,आज विश्व में भारत की गिनती एक औसत दर्जे के देश में होती है,जहां आज भी शिक्षा की पहुंच 100 फीसदी लोगों तक नहीं है.जिसने विश्व को शिक्षित किया वह खुद आज अशिक्षित है,सदैव प्रकाशवाण रहने वाली यह भूमि आज अंधकार में है.दुनिया को रौशनी दिखाने वाली यह धरती आज खुद रौशनी की तलाश में है.इन सब परिस्थितियों के उत्पन होने के पीछे कारण जो भी हो इसका पता लगा हमें उस दिशा में बढ़ने की ज़रूरत है.यदि हम एक बार पुनः सही रास्ते का खोज कर उस पर चलते हैं तो कोई कारण नहीं जो हमें अपनी खोई प्रतिष्ठा प्राप्त करने से रोक ले.हम एक बार फ़िर विश्व सोच बन जायेंगे यह विश्वास हर एक जन को अपने अंदर पैदा करना होगा.अगर यह संकल्पना हम सभी लेते हैं तो भारत एक बार फ़िर उसी ऊर्जा के साथ उगेगा,निश्चित रुप से उगेगा क्योंकि किसी अँधेरे में इतनी ताकत नहीं जो आफ़ताब से उठने वाली किरणों को अपनी आगोश में छुपा लें.यह किरण चीर देगी हर उस अँधेरे को जिसने हमारी पहचान पर काली पट्टी लगा रखी है.हम फिर प्रदीप्त हो जायेंगे बशर्ते हमारा विश्वास निरंतर अडिग रहे.
धन्यवाद!आपका विचारक:नयन 

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