Saturday, 7 November 2015

महिलाओं के बिना समाज का विकास अधूरा




महिलायें समाज का आधार होती हैं.महिलाओं को जगत जननी का दर्जा प्राप्त हैं.एक समृद्ध राष्ट्र कि कल्पना तभी की जा सकती है जब वहां की महिलायें शिक्षित हों.खुशहाल समाज का निर्माण शिक्षित महिलाओं की उपस्थिति से ही होता है.इसमें कोई दो राय नहीं की समाज के विकास के लिये महिलाओं का विकास ज़रूरी है.पर अफसोस!आज भी हमारे देश में महिला शिक्षा दर 100 फीसदी नहीं है.महिलाओं की निरक्षरता उसकी आवाज़ को बुलंद न होने देने का सबसे बड़ा कारण है.समाज की दो धूरी में एक महिलाओं का शिक्षित होना किसी भी राष्ट्र की प्रगति के लिये सर्वदा ज़रूरी है.महिला सशक्तिकरण,सुदृढीकरण ये सब नारे तभी सफल होंगे जब महिलाएँ जागरूक होंगी.और यह जगजाहिर है कि जागरूकता बिना शिक्षा के सम्भव नहीं !आज हर तरफ़ महिलाओं पर हों रहें अत्याचार,जुर्म व भेद-भाव की खबरें सामने आ रही हैं.पुरुषवादी इस समाज में महिलाओं की स्थिति कुछ-कुछ उस बंधुआ मजदूर की तरह हो गयी है जिसे जब चाहा जैसे चाहा अपने स्वार्थ खातिर उपयोग कर लिया.
आज समाज की दो धूरी स्त्री और पुरुष के बीच की खाई विशाल हो गयी है.अगर कुछ उदाहरण को छोड़ दिया जाये तो समाज में महिलाओं के विचार गौण हैं.उनकी महत्ता नगण्य हैं.समाज में उनका योगदान पुरुषों की तुलना में बहुत काम है.ऐसा क्यों ?
जब समाज की उत्पत्ति में दोनों का बराबर योगदान है तो इसके निर्माण में क्यों नहीं !किसी भी राष्ट्र के सम्यक विकास की नीति में महिलाओं के योगदान को नकारा नहीं जा सकता और महिलाएँ तभी पुरुष से कदमताल कर समाज में अपना योगदान दें सकेंगी जब वह शिक्षित हों.ऐसी अवधारणा है की बच्चे का प्रथम गुरु उसकी माँ होती हैं,लेकिन जब समाज का प्रथम गुरु ही निरक्षर होगा तो शिक्षित,खुशहाल और समृद्ध राष्ट्र की कल्पना करना कितना जायज होगा!!!
नयन 

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