Sunday, 24 January 2016

सही मायने में बोस थे नेताजी


"तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आज़ादी दूंगा" यह वाक्य हमारे जेहन में आते ही नेताजी सुभाष चंद्र बोस की यादें ताजा हो जाती हैं.स्वतंत्रता आंदोलन में नेताजी के बहुमूल्य योगदान से हम सभी परिचित हैं.नेताजी उन स्वतंत्रता आंदोलनकारियों में एक हैं जिन्होंने हमें अंग्रेजों के चंगुल से मुक्त करवाया.आज सम्पूर्ण कृतज्ञ राष्ट्र उन्हें उनकी 119 वीं जयंती पर याद कर रहा है.
सुभाष चंद्र बोस बचपन से ही दिव्य प्रतिभा के धनी व्यक्ति थें.खुद के बनाए रास्ते पर चलने वाले सुभाष बोस अडिग विचारधारा के पुरुष थे.अपने दिये वचन को पूरा करने के लिये उन्हें चाहे जो भी परिस्थितियों से गुजरना परे,जो भी कष्ट उठाना परे वो उसके लिये सदेव तैयार रहते थें.वह नेताजी ही थे जिन्होंने अपनी प्रतिभा को निरूपित करने के लिये पहले भारत की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा 'सिविल सर्विस'को पहले पास किया फ़िर त्याग पत्र दे दिया.उनकी जीवन दृष्टि बिल्कुल साफ थी.वो खुद के लिये नहीं देश के लिये जीना चाहते थे और आजीवन देश के लिये जीते रहें.सुभाष चंद्र बोस अद्वितीय चरित्र के व्यक्ति थें.उनकी सोच,विषम समय में दिये गए विचार आज भी हमारे जीवन की विभिन्न अवस्था में तर्कसंगत हैं.हमारे स्वतंत्रता आंदोलनकारियों में उनकी पहचान गरम दल के नेता के रूप में थी.वह दुश्मनों को हर वक्त पीड़ा देने में विश्वास रखते थे.जब दुनिया द्वितीय विश्वयुध्द के दहलीज पे खड़ी थी तो कॉंग्रेस,तब भारत को आज़ादी दिलाने के लिये गठित संस्था में यह प्रश्न बड़े जोर से उठा कि भारत किसके पक्ष में होगा.तब सुभाष बोस ने कॉंग्रेस अध्यक्ष के नाते कहा था कि"दुश्मन का दुश्मन हमरा दोस्त होगा"नेताजी के इस विचार से कॉंग्रेस के सभी सदस्य असहमत हो गए परिणामस्वरूप नेताजी ने कॉंग्रेस अध्यक्ष पद से त्याग पत्र दे दिया.इस्तीफा देने के बाद भी नेताजी शांत नहीं बैठे उन्होंने अंग्रेजों से दो-दो हाथ करने के लिये अपनी एक अलग रणनीति बनाई.अपनी अलग सेना का गठन किया और उसके सेना नायक बने.भारत को आज़ादी दिलाने के लिये उन्होंने कई राष्ट्रों की सेना को अपने साथ किया.वो जल्द ही विदेशी सेना के साथ मिलकर अंग्रेजों पर आक्रमण करने वाले थे पर नीयति को कुछ और ही मंजूर था और 18 अगस्त,1945 को एक विमान दुर्घटना में उनकी मौत हो गई.नेताजी अब हमारे बीच नहीं हैं.लेकिन,उनकी सोच,विचार  और अदम्य साहस ने उनके पीछे क्रान्तिकारियों की एक विशाल फौज छोड़ गई जिन्होंने हमें आज़ादी दिलाई और नेताजी के अधूरे सपने को पूरा किया.सुभाष चंद्र बोस सही मायने में बोस थें.उनको याद करने का,उनके प्रति श्रध्दा सुमन अर्पित करने का सबसे अच्छा तरीका यह है  कि हम उनकी अच्छाइयो को अपने जीवन में उतारें.
जय हिंद !!!

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