Tuesday, 16 August 2016

लापता विमान एएन-32 का अब तक कोई सुराग नहीं


एयरफोर्स का मालवाहक विमान एएन-32 पिछले  27 दिनों से लापता है.विमान में चालक दल के छह सदस्य मिलाकर कुल 35 लोग थे.जहाज चेन्नई से पोर्टब्लेयर जा रही थी.विमान के पहुँचने का इंतज़ार आज भी किया जा रहा है.अभी तक यह गुमशुदा है.

अपनों से एक दिन का विरह चुभाने वाला होता है.जुदाई पे न जाने कितने लेखकों व कवियों ने अपनी भावनाओं को उपस्थित किया है.आज देश के 35 परिवारों व उनके चाहने वालों की मानसिक पीड़ा की हम सिर्फ कल्पना कर सकते हैं.हर रोज उनके अपने ये सोच कर सो जाते होंगे कि कल कुछ पता चल जायेगा.अब तो शायद उम्मीदों पर भी उम्मीद नहीं होता होगा.वक्त जो इतने गुजर गए.

विमान को ढूंढने की पुरजोर कोशिश की जा रही है.जल,थल और वायु तीनों जगह से सर्च अभियान जारी है.मदद सेटेलाइट्स की भी ली गई है.तमाम आधुनिक यंत्रों से पता लगाने की कोशिश जारी है.तलाशी अभियान में दूसरे देशों से भी सहायता की अपील की गई है.अफ़सोस! विमान का पता आज तक नहीं चल पाया.सर्च ऑपरेशन जारी है.उम्मीदों का दीया भी जल रहा है.

कहते हैं विज्ञान ने तरक्की कर ली.जिंदगी आसान हो गई है.हर तरफ़ नवीन तकनीक की बयार है.अब तो मंगल सहित अन्य ग्रहों पर जिंदगी की भी तलाश हो रही है.कितनी रोमांचक बातें हैं.सोच के मन पुलकित हो उठता है.हकीकत देखिये.नवीन तकनीक का खोखला रुप सामने है.पिछले 27 दिनों में एक जहाज़ का पता नहीं लग पाया.किसी को कोस नहीं रहा हूं.कितने बेचारे हैं हम ये महसूस कर रहा हूं.

कुछ सवाल भी हैं.पूछा जाना जायज है.क्या उड़ान भरने से पहले विमान की जांच हुई थी.जहाज कितने वर्ष पुराना था.आखिर एयर ट्रेफिक कंट्रोल से सिग्नल टूटने का कारण क्या था.ये ऐसे सवाल हैं जिसका जवाब सरकार को देना चाहिये.विमान गुमशुदगी का लम्बा इतिहास है.हमारी बढ़ी हुई तकनीक आज भी इसे रोकने में नाकामयाब है.यह चिंता का सबब है.

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