Saturday, 17 September 2016

शहादत की हो रही है अवहेलना



उसने देश की रक्षा की कसमें खायी थी.उसने वचन लिया था,भारत माता की ओर उठने वाली तमाम उँगली को झुकाने का.उसने अपनी ज़िंदगी राष्ट्र को अर्पित कर दी थी.वो मादरे वतन का सच्चा सिपाही था.

अफ़सोस!!देश का वो जाबांज अब हमारे बीच नहीं है.मात्र 21 साल की आयु में मृत्यु की शैय्या पर वो अनंत निंद्रा में सो गया.उसने देश के लिये सर्वोच्च बलिदान दिया.हम उनकी शहादत को नमन करते हैं.हम उनके अप्रतिम साहस का वंदन करते हैं.वो हमारे आदर्श हैं.

हम अपने जवानों पर गर्व करते हैं.उनकी शहादत पर आंशु बहाते हैं.नेताओं का गला रुंध जाता है.मुँह रुआंसा हो जाता है.इस दस्तूर पर सभी अपनी-अपनी कह देते हैं.पर आगे की सच्चाई बहुत कड़वी है.ये सब तमाम एक रस्म अदायगी साबित होते हैं.परिवार को मदद मिलने में सालों लग जाते हैं.सरकारी कार्यालय में परिवार वालों को बार-बार आश्वासन दिया जाता है.फिर जाने पर उन्हें दुत्कारा जाता है.

अपने बेटे के गम में तिल-तिल जीता एक पिता आज हर रोज मरता है.एक बेटा था.घर की सारी जिम्मेदारी उसके कंधों पर थी.अब वो नहीं रहा.बुढ़े बाप के लिये घर चलाना मुश्किल हो गया है.सरकारी मदद में टाल-मटोली बदस्तूर जारी है.उसके पिता आज ये भी सोचते होंगे,बेटे को सिपाही न बनने देता तो ये दिन न देखने परते.

एक माँ की रक्षा में मौत को गले लगाते वक्त उसने यही सोचा होगा,मेरी माँ का देखभाल करने,मेरे देश का 125 करोड़ बेटा उसके साथ होगा.
दुखी हूं!!उसके सोच को हमने,हमारे सिस्टम ने गलत साबित कर दिया.

Sunday, 11 September 2016

शहाबुद्दीन की रिहाई,नीतीश का होगा लिटमस टेस्ट



बिहार से एक सनसनी फैली है।चर्चा हर तरफ है।सोशल मीडिया का टाइमलाइन इस सनसनी की खबरों से सराबोर है।सबलोग लिख लेना चाहते है।अपनी भड़ास उड़ेल देना चाहते हैं।दरअसल पटना हाईकोर्ट ने बिहार के कुख्यात नेता शहाबुद्दीन को जमानत दे दिया है।शहाबुद्दीन जेल से निकल चुके हैं और अब आज़ाद हैं।इस ख़बर ने जन-मन को सकते में ला दिया है।कहीं आक्रोश है।कहीं वेदना है।कहीं ख़ुशी का माहौल व्याप्त है।

कुछ लोग न्यायिक व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं।कुछ सरकार को कोस रहें है।सच यही है,शहाबुद्दीन अब खुली आसमान के नीचे आज़ाद हैं।ये हम सबों को स्वीकारना होगा।हालांकि सरकार को कोसने वाले लोगों के अपने तर्क भी हैं।सरकार कुख्यात अपराधी को बाहर आने से रोक सकती है।ये विशेषाधिकार सरकार के पास होता है।चाहे अपराधी को कोर्ट से जमानत क्यों न मिल चुकी हो।ऐसा सरकार को कोसने वालों का कहना है।वो इस संदर्भ में बिहार के बाहुबली नेता अनंत सिंह का जिक्र करते हैं।अनंत सिंह अभी जेल में हैं।लोगों का कहना है,सरकार ने इसी कानून का उपयोग कर अनंत सिंह को जेल से बाहर आने नहीं दिया।हालांकि इस संन्दर्भ में कानूनविदों की राय ज्यादा अहम् होगी।मुझे इस पर ज्यादा नहीं कहना।

शहाबुद्दीन ने जेल से छूटते ही राज्य की सियासत में खलबली मचा दी है।नीतीश कुमार को परिस्थिति विशेष का मुख्यमंत्री बता,शहाबुद्दीन मीडिया के साथ-साथ राजनीतिक लोगों का भी ध्यान अपनी ओर खींचने में कामयाब रहे।ये सब सिर्फ खुद की गरमाई उपस्थिति दर्ज कराने का तरीका था या बिहार की राजनीति में आने वाली भूचाल की आहट,ये तो फ़िलहाल वक्त के गर्भ में है।शहाबुद्दीन के बयान के बाद आरजेडी नेता रघुवंश प्रसाद सिंह जिस तरह मुखर रूप से सामने आ रहे हैं, इसके अलग राजनीतिक मायने प्रतीत होते हैं।खैर, नीतीश कुमार ने तमाम बयानों को महत्वहीन बता,फ़िलहाल राजनीतिक अटकलों पर लगाम लगा दिया है।

बिहार में नीतीश कुमार की छवि सुशासन बाबू की है।2005 में सत्ता में आते ही नीतीश कुमार ने राज्य में कानून व्यवस्था को मज़बूत करने के लिये कई निर्णय लिए।राज्य में कानून व्यवस्था में सुधार भी आया।पर अब परिस्थिति विपरीत है।नीतीश कुमार महा गठबंधन से मुख्यमंत्री बने हैं।लालू प्रसाद यादव की पार्टी आरजेडी गठबंधन की सबसे बड़ी पार्टी है।ऐसे में नीतीश कुमार गठबंधन धर्म  से बंधे हुए हैं।शहाबुद्दीन लालू के करीबी हैं।उनका एक बड़ा क्रिमिनल रिकॉर्ड है।इस परिस्थिति में राज्य में कानून का राज बनाये रखना नीतीश के सामने बड़ी चुनौती होगी।मतलब अब होगा बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का लिटमस टेस्ट।

Friday, 2 September 2016

डिजिटल इंडिया के गोद में रिलायंस जीओ को पालने की अम्बानी चाल



रिलायंस जीओ डिजिटल इंडिया को देश में सस्ती लोकप्रियता दिलाने का है छद्म प्रयास.डिजिटल इंडिया के मूल मकसद से भटकाने की ये है एक गहरी साजिश.डिजिटल इंडिया की आड़ में कॉरपोरट को लाभ दिलाने की हो रही है कोशिश.

मोदी सरकार का विरोधी नहीं हूं.आप कुछ सोचें या बोलें उससे पहले कुछ और लिख देता हूं.
क्या मोदी सरकार ने देश की आँखों को जिस डिजिटल इंडिया का सपना दिखाया था,उसका परिणाम रिलायंस जीओ था! क्या अम्बानी के जीओ की बुनियादी पर  मोदी सरकार ने देश के हर नौनिहालों के हाथ में कंप्यूटर हों,का सपना देखा था.या यही था आमजन को टेक्नो फ्रेंडली बनाने का डिजिटल इंडिया के तहत प्रयास.

देश की एक चौताही जनता निरक्षर है.10वीं पास करने वाले आधे से अधिक बच्चे उच्च शिक्षा नहीं ले पाते हैं.ज़रूरत लोगों शाक्षर करने के साथ डिजिटल लिटरेट करने की है.डिजिटल इंडिया का मुख्य लक्ष्य भी यही होना चाहिये.इन्फ़ॉर्मेशन टेक्नॉलॉजी के इस्तेमाल से सरकारी कामों में पारदर्शिता,तीव्रता व गवर्नमेंट ऑफिस पेपरलेस हों इस मकसद से डिजिटल इंडिया का विज़न छिटकता प्रतीत होता है.

रिलायंस जीओ अम्बानी के व्यापार का निजी तत्व है.डिजिटल इंडिया के विज़न के तौर पर रिलायंस ग्रुप इसे मार्केट में प्रचारित कर रहा है.यह गलत है.कॉरपोरट व सरकार की इसमें साठगांठ नज़र आ रही है.अगर नहीं तो सरकार को इस प्रचार से तुरंत खुद को अलग करना चाहिये.

सरकारी योजना का अपना महत्व होता है.इसकी सफलता-असफलता से सरकार के कार्यकाल का मूल्यांकन होता है.ऐसे में हम सब जानते हैं,रिलायंस जीओ एक विशुद्ध प्राइवेट प्रयास है.एक प्राइवेट कंपनी घाटे की स्थिति में अपने किसी भी व्यापार को बंद कर सकती है.अगर जीओ भविष्य में असफल होता है,तो क्या डिजिटल इंडिया को असफल योजना मान लिया जाएगा!!