उसने देश की रक्षा की कसमें खायी थी.उसने वचन लिया था,भारत माता की ओर उठने वाली तमाम उँगली को झुकाने का.उसने अपनी ज़िंदगी राष्ट्र को अर्पित कर दी थी.वो मादरे वतन का सच्चा सिपाही था.
अफ़सोस!!देश का वो जाबांज अब हमारे बीच नहीं है.मात्र 21 साल की आयु में मृत्यु की शैय्या पर वो अनंत निंद्रा में सो गया.उसने देश के लिये सर्वोच्च बलिदान दिया.हम उनकी शहादत को नमन करते हैं.हम उनके अप्रतिम साहस का वंदन करते हैं.वो हमारे आदर्श हैं.
हम अपने जवानों पर गर्व करते हैं.उनकी शहादत पर आंशु बहाते हैं.नेताओं का गला रुंध जाता है.मुँह रुआंसा हो जाता है.इस दस्तूर पर सभी अपनी-अपनी कह देते हैं.पर आगे की सच्चाई बहुत कड़वी है.ये सब तमाम एक रस्म अदायगी साबित होते हैं.परिवार को मदद मिलने में सालों लग जाते हैं.सरकारी कार्यालय में परिवार वालों को बार-बार आश्वासन दिया जाता है.फिर जाने पर उन्हें दुत्कारा जाता है.
अपने बेटे के गम में तिल-तिल जीता एक पिता आज हर रोज मरता है.एक बेटा था.घर की सारी जिम्मेदारी उसके कंधों पर थी.अब वो नहीं रहा.बुढ़े बाप के लिये घर चलाना मुश्किल हो गया है.सरकारी मदद में टाल-मटोली बदस्तूर जारी है.उसके पिता आज ये भी सोचते होंगे,बेटे को सिपाही न बनने देता तो ये दिन न देखने परते.
एक माँ की रक्षा में मौत को गले लगाते वक्त उसने यही सोचा होगा,मेरी माँ का देखभाल करने,मेरे देश का 125 करोड़ बेटा उसके साथ होगा.
दुखी हूं!!उसके सोच को हमने,हमारे सिस्टम ने गलत साबित कर दिया.


