Sunday, 11 September 2016

शहाबुद्दीन की रिहाई,नीतीश का होगा लिटमस टेस्ट



बिहार से एक सनसनी फैली है।चर्चा हर तरफ है।सोशल मीडिया का टाइमलाइन इस सनसनी की खबरों से सराबोर है।सबलोग लिख लेना चाहते है।अपनी भड़ास उड़ेल देना चाहते हैं।दरअसल पटना हाईकोर्ट ने बिहार के कुख्यात नेता शहाबुद्दीन को जमानत दे दिया है।शहाबुद्दीन जेल से निकल चुके हैं और अब आज़ाद हैं।इस ख़बर ने जन-मन को सकते में ला दिया है।कहीं आक्रोश है।कहीं वेदना है।कहीं ख़ुशी का माहौल व्याप्त है।

कुछ लोग न्यायिक व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं।कुछ सरकार को कोस रहें है।सच यही है,शहाबुद्दीन अब खुली आसमान के नीचे आज़ाद हैं।ये हम सबों को स्वीकारना होगा।हालांकि सरकार को कोसने वाले लोगों के अपने तर्क भी हैं।सरकार कुख्यात अपराधी को बाहर आने से रोक सकती है।ये विशेषाधिकार सरकार के पास होता है।चाहे अपराधी को कोर्ट से जमानत क्यों न मिल चुकी हो।ऐसा सरकार को कोसने वालों का कहना है।वो इस संदर्भ में बिहार के बाहुबली नेता अनंत सिंह का जिक्र करते हैं।अनंत सिंह अभी जेल में हैं।लोगों का कहना है,सरकार ने इसी कानून का उपयोग कर अनंत सिंह को जेल से बाहर आने नहीं दिया।हालांकि इस संन्दर्भ में कानूनविदों की राय ज्यादा अहम् होगी।मुझे इस पर ज्यादा नहीं कहना।

शहाबुद्दीन ने जेल से छूटते ही राज्य की सियासत में खलबली मचा दी है।नीतीश कुमार को परिस्थिति विशेष का मुख्यमंत्री बता,शहाबुद्दीन मीडिया के साथ-साथ राजनीतिक लोगों का भी ध्यान अपनी ओर खींचने में कामयाब रहे।ये सब सिर्फ खुद की गरमाई उपस्थिति दर्ज कराने का तरीका था या बिहार की राजनीति में आने वाली भूचाल की आहट,ये तो फ़िलहाल वक्त के गर्भ में है।शहाबुद्दीन के बयान के बाद आरजेडी नेता रघुवंश प्रसाद सिंह जिस तरह मुखर रूप से सामने आ रहे हैं, इसके अलग राजनीतिक मायने प्रतीत होते हैं।खैर, नीतीश कुमार ने तमाम बयानों को महत्वहीन बता,फ़िलहाल राजनीतिक अटकलों पर लगाम लगा दिया है।

बिहार में नीतीश कुमार की छवि सुशासन बाबू की है।2005 में सत्ता में आते ही नीतीश कुमार ने राज्य में कानून व्यवस्था को मज़बूत करने के लिये कई निर्णय लिए।राज्य में कानून व्यवस्था में सुधार भी आया।पर अब परिस्थिति विपरीत है।नीतीश कुमार महा गठबंधन से मुख्यमंत्री बने हैं।लालू प्रसाद यादव की पार्टी आरजेडी गठबंधन की सबसे बड़ी पार्टी है।ऐसे में नीतीश कुमार गठबंधन धर्म  से बंधे हुए हैं।शहाबुद्दीन लालू के करीबी हैं।उनका एक बड़ा क्रिमिनल रिकॉर्ड है।इस परिस्थिति में राज्य में कानून का राज बनाये रखना नीतीश के सामने बड़ी चुनौती होगी।मतलब अब होगा बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का लिटमस टेस्ट।

No comments:

Post a Comment