Friday, 2 September 2016

डिजिटल इंडिया के गोद में रिलायंस जीओ को पालने की अम्बानी चाल



रिलायंस जीओ डिजिटल इंडिया को देश में सस्ती लोकप्रियता दिलाने का है छद्म प्रयास.डिजिटल इंडिया के मूल मकसद से भटकाने की ये है एक गहरी साजिश.डिजिटल इंडिया की आड़ में कॉरपोरट को लाभ दिलाने की हो रही है कोशिश.

मोदी सरकार का विरोधी नहीं हूं.आप कुछ सोचें या बोलें उससे पहले कुछ और लिख देता हूं.
क्या मोदी सरकार ने देश की आँखों को जिस डिजिटल इंडिया का सपना दिखाया था,उसका परिणाम रिलायंस जीओ था! क्या अम्बानी के जीओ की बुनियादी पर  मोदी सरकार ने देश के हर नौनिहालों के हाथ में कंप्यूटर हों,का सपना देखा था.या यही था आमजन को टेक्नो फ्रेंडली बनाने का डिजिटल इंडिया के तहत प्रयास.

देश की एक चौताही जनता निरक्षर है.10वीं पास करने वाले आधे से अधिक बच्चे उच्च शिक्षा नहीं ले पाते हैं.ज़रूरत लोगों शाक्षर करने के साथ डिजिटल लिटरेट करने की है.डिजिटल इंडिया का मुख्य लक्ष्य भी यही होना चाहिये.इन्फ़ॉर्मेशन टेक्नॉलॉजी के इस्तेमाल से सरकारी कामों में पारदर्शिता,तीव्रता व गवर्नमेंट ऑफिस पेपरलेस हों इस मकसद से डिजिटल इंडिया का विज़न छिटकता प्रतीत होता है.

रिलायंस जीओ अम्बानी के व्यापार का निजी तत्व है.डिजिटल इंडिया के विज़न के तौर पर रिलायंस ग्रुप इसे मार्केट में प्रचारित कर रहा है.यह गलत है.कॉरपोरट व सरकार की इसमें साठगांठ नज़र आ रही है.अगर नहीं तो सरकार को इस प्रचार से तुरंत खुद को अलग करना चाहिये.

सरकारी योजना का अपना महत्व होता है.इसकी सफलता-असफलता से सरकार के कार्यकाल का मूल्यांकन होता है.ऐसे में हम सब जानते हैं,रिलायंस जीओ एक विशुद्ध प्राइवेट प्रयास है.एक प्राइवेट कंपनी घाटे की स्थिति में अपने किसी भी व्यापार को बंद कर सकती है.अगर जीओ भविष्य में असफल होता है,तो क्या डिजिटल इंडिया को असफल योजना मान लिया जाएगा!!

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