Tuesday, 22 November 2016

यात्री सुरक्षा पर ध्यान दे रेलवे



दुर्घटना छोटी हो या बड़ी पीड़ा दायक होती है.जान-माल की क्षति होती है तुरत और उसका असर सालों-साल रहता है.जो अपने करीबी को खोते हैं जीवन भर की जुदाई दुर्घटना उन्हें समय के एक झटके में दे देती है.कोई आजीवन बिस्तर का गुलाम बन जाता है.न जाने कितने सपनों को दुर्घटना क्षत-विक्षत कर देती है.एक पल में कोई विधवा,तो ऑफिस से आने में थोड़ी देर लेट होने पर फोन कर डांट लगाने वाली अलविदा कह देती है.जिन बच्चों को माँ बाप ने बड़े होकर इंजिनियर,डॉक्टर,ऑफिसर और न जाने क्या-क्या बनने के सपने देखें थे,वो पल भर में चूर हो जाते हैं.यह दुर्घटना बहुत निर्मम होती है.ये दर्द बहुत कड़वी देती है.

कानपुर के नज़दीक हुई रेल दुर्घटना हालिया वर्षों में सबसे वीभत्स है.अभी तक 146 लोगों की जाने जा चुकी हैं,200 से अधिक लोग गंभीर रूप से जख्मी हैं.ट्रेन इंदोर से पटना जा रही थी.घटना उस वक्त हुई जब कुछ ही समय बाद एक नयी सुबह दस्तक देने वाली थी.रात के करीब तीन बज रहे थे.एक जोरदार आवाज़ आती है और उसके बाद हर तरफ़ चीख-पुकारें.ट्रेन का 14 डिब्बा पटरी से उतर जाता है.एक तरफ़ मौत की खामोशी रहती है दूसरी तरफ़ घायलों की चीत्कार.रात के घने अंधेरे में हर तरफ़ दर्द व मातम पसरा था.यात्रियों के बदन से निकलते रक्त धरती को लाल किये जा रही थीं.सब तहस नहस हो गया था.

लोग घरों में अपनों के पहुंचने का इंतज़ार कर रहे थे.पर सुबह की पहली किरण के साथ आयी ख़बर ने उन्हें मर्माहत कर दिया.फोन घनघनाने लगीं.अपनों के बारे में जानने को लोग छटपटाने लगे.न्यूज़ चैनलों पर खबरें चलने लगी.हर मिनट मरने वालों की संख्या बढ़ती ही जा रही थी,जो परिवार वालों की बेचैनी को बढ़ा रही थी.दुर्घटना को रोका नहीं जा सकता है इससे इंकार नहीं है,पर वैज्ञानिक प्रगति के साथ इसे कम ज़रूर किया जा सकता है.भारतीय रेल देश की लाइफ लाइन है.यह पुरे देश की दूरी को पाटती है.दिलों को दिलों से जोड़ती है.पर दिलों को दिल से मिलाने वाली भारतीय रेल जब लोगों को काल के गाल में झोंक दे,तो इसका जिम्मेदार कौन होगा?

हर साल रेलबजट में बड़ी-बड़ी बातें होती हैं.यात्रियों की सुरक्षा को पहली प्राथमिकता बताया जाता है.लोगों की मंगल यात्रा के लिये घोषणाओं के पूल बांध दिये जाते हैं.यकीन न हो तो रिकॉर्ड कहता है कि पुरानी घोषित योजनाओं को पुरा करने के लिये रेलवे को लाखों करोड़ रुपये की जरूरत है.पर नई घोषणायें पुरानी हो जाती हैं और जनता को लुभाने के लिये फिर नये सपने दिखाये जाते हैं.हाई स्पीड ट्रेन व वाईफाई की बातें ठीक है.यात्रियों को सुरक्षित गंतव्य तक पहुंचना पहली जरूरत है.रेल दुर्घटना का एक लम्बा इतिहास रहा है,जिसमें न जाने कितने लोगों ने अपनी जिंदगी खोई हैं.अब जब हम बुलेट ट्रेन चलाने की बात कर रहे हैं,तो यात्रा के दौरान लोग महफूज़ रहें इसपे भी काम होनी चाहिये.

मंगलयान की सफलता लोगों के जेहन में अमर हो जाये इसके लिये सरकार ने मंगलयान की तस्वीर को नोटों पे उतरवा दिया.फक्र का विषय है.किसी को कोई शिकायत नहीं है.समय की दरकार है रेलवे में भी नयी टेक्नॉलॉजी पिरोयी जाये.इसे आधुनिक बनाया क
जाये.तकनीक के सहारे रेलवे सुरक्षा को पुख्ता किया जा सकता है.सरकार लोगों के जान की कीमत को समझें और रेलवे में तकनीक का इस्तेमाल कर इसे उच्च सुरक्षा मानकों पर खड़ा करें.फिर घरों में अपनों का इंतजार करने वाले परिजनों को आशंकाओं के बादल नहीं डराएंगे.रात में यात्रा करने वाले यात्रियों को अनहोनी का डर नहीं रहेगा और वो पुरे सफर चैन की नींद ले सकेंगे.

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