हाल ही में UPSC व IIT में प्रवेश के लिए होने वाली JEE एडवांस के रिजल्ट आये हैं।इन प्रतियोगी परीक्षाओं में बिहारी छात्रों का एक बड़ा प्रतिशत हर साल सफल होता है,पर इस साल बिहार के बच्चों का सक्सेस रेट अन्य सालों की तुलना में घटा है।प्रतिष्ठित परीक्षाओं में बिहारी छात्रों के घटते सफलता रेट पर प्रकाश डालता यह आलेख।
बिहार प्रदेश को लोग कितने भी घटिया से घटिया विशेषण से क्यों न अलंकृत करें,मगर यह सभी खुले मन से स्वीकार करते हैं कि वहां के बच्चे पढ़ने में होनहार व विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में बहुत से विकसित प्रदेशों से आगे रहते हैं।बात UPSC की हो या बैंक,एस एस सी की बिहार के बच्चे अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते रहे हैं।पिछड़े प्रदेश के टैग को लगभग स्थायी बना चुके बिहार के लिये वाकई यह संतोषप्रद है कि उसका नाम अभी भी उसके होनहारों के कारण राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर तारों की तरह टिमटिमा रहा है।प्राकृतिक संसाधन के रूप में बिहार में सिर्फ मानव संसाधन हैं,जिसे बिहार सरकार कीमती संसाधन नहीं मानती है।लिहाजा इसे तराशने का काम नहीं किया जाता है।अंकगणितीय गणना के तहत बिहार में कुछ उद्योग धंधे जरूर हैं,जो अभी अपनी अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं।खैर,ये बिहार की सच्चाई है,इसे हम लिखें या न लिखें यह बदलने वाला नहीं है।हम बात बिहारी छात्रों के प्रतिभा व विभिन्न क्षेत्रों में उनके शानदार प्रदर्शन की कर रहे हैं,जिसमें इधर कुछ समय से गिरावट दर्ज की जा रही है।
UPSC द्वारा ली जाने वाली सिविल सर्विसेज एग्जाम देश की एक कठिनतम परीक्षा है और इस एग्जाम में बिहारी छात्रों के शानदार प्रदर्शन से सभी लोग वाकिफ हैं।UPSC में यहां के बच्चों के उच्च सक्सेस रेट के कारण ही बिहार को लोग "ब्यूरोक्रेट्स की फैक्ट्री" भी कहते हैं।पर इधर कुछ समय से इन परीक्षाओं में बिहारी बच्चों का सफलता प्रतिशत पहले से कमता दिख रहा है।1972-96 के बीच बिहार के लगभग आधे दर्जन से अधिक छात्रों ने देश की प्रतिष्ठित UPSC की परीक्षा में टॉप किया है।पर 1996 के बाद से अभी तक का रिजल्ट देखें तो पिछले 22 वर्षों में बिहार से किसी भी छात्र ने इस परीक्षा में टॉप नहीं किया है।ऐसा नहीं है कि टॉप करना ही सफलता को मापने का एक मानक है,पर यह सफलता का चरम बिंदु है इससे भी इंकार नहीं किया जा सकता है।साल 2014 में बिहार के 83 युवकों ने UPSC एग्जाम में सफलता हासिल की,जो कि कुल सफल कैंडिडेट्स का एक बड़ा हिस्सा था।इसी वर्ष के रिजल्ट में यहां के सात उम्मीदवारों को टॉप 100 में जगह मिली थी।यह बिहार के छात्रों का एक कड़ी प्रतिस्पर्धा वाले एग्जाम में जानदार प्रदर्शन था।पर हम इस साल के रिजल्ट को देखें,तो सफलता का गिरता ग्राफ साफ दिखता है।इस वर्ष कुल सफल हुए 1099 उम्मीदवारों में बिहार से सिर्फ 31 उम्मीदवारों को सफलता मिली है।पूर्ववर्ती प्रदर्शन के लिहाज से यह बिहारी छात्रों का बढ़िया प्रदर्शन नहीं कहा जा सकता है।बात तकनीकी शिक्षा की करें तो यहां भी गाड़ी बेपटरी होती नजर आ रही है।
इस साल के JEE एडवांस रिजल्ट में बिहार से बेस्ट रैंक 72 है।एक खबर के मुताबिक देश के बेस्ट तकनीकी संस्थान ITTs में जितने बच्चे मुम्बई,दिल्ली व चेन्नई रीजन से जाते हैं उसका सिर्फ आधा हिस्सा ही बिहार से जाता है।सबसे अधिक बच्चों को IITs व NITs में भेजने वाले प्रदेशों में बिहार का स्थान पांचवा है।मानव संसाधन की प्रचुरता व प्रतिभावान प्रदेश का तमगा हासिल बिहार के लिए यह आंकड़े कतई अच्छे नहीं कहे जा सकते हैं।
अर्थशास्त्र के मुताबिक शिक्षा पे किया जाने वाला खर्च निवेश होता है।एजुकेशन और हेल्थ सेक्टर पर किया जाने वाला खर्च किसी और मद में किये गए खर्च से अधिक परिणामकारी होता है।बिहार सरकार को भी यह बात समझनी होगी।प्राकृतिक संसाधन अगर बिहार में नहीं हैं,तो इसका रोना रोने से यह प्रदेश में आ नहीं जाएंगे।जो चीजें प्रदेश में समुचित मात्रा में हैं,सरकार को उसका सुनियोजित उपयोग करना सीखना चाहिए।कमियां सृजनात्मक बनाने वाली होती हैं।बिहार सरकार को भी सृजनात्मक तरीके से प्रदेश में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध मानव संसाधन के बेहतर से बेहतर इस्तेमाल करने का तरीका ईज़ाद करना चाहिए।प्रतिष्ठित परीक्षाओं में बिहार का घटता रिजल्ट बिहार की एक अस्मिता को मलिन कर रहा है।यह वक्त की मांग है कि घटते रिजल्ट के कारनों का पता कर सरकार इसे दुरुस्त करने का प्रयास करें।बिहार एक प्रतिभावान राज्य है,पर यह ब्रह्म वरदान नहीं कि बिहार हर वक्त प्रतिभावान रहेगा।इसे प्रतिभावान बनाये रखने के लिए सरकार को कुछ मूल चीजों को करने की जरूरत है।जैसे-सरकार स्कूल,कॉलेजों में योग्य शिक्षकों का चयन करें।तीक्ष्ण बुद्धि वाले छात्रों की पहचान कर उन्हें आला दर्जे की तालीम देकर सरकार उन बच्चों को एक प्लेटफॉर्म मुहैय्या करा सकती है,जहां से वे बच्चे खुद अपने सपनों की उड़ान भरेंगे और प्रदेश का नाम रोशन करेंगे।

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