उत्तरप्रेदश की राजनीति में आ गया है बड़ा भूचाल.बहुजन समाज पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव के इस्तीफे से उपजा है नया राजनीतिक विवाद.स्वामी प्रसाद मौर्य ने इस्तीफे के बाद पार्टी प्रमुख मायावती पर लगाए हैं कई संगीन आरोप.मौर्य ने मायावती को दलित की नहीं,दौलत की बेटी कहकर सियासत की दुनियां में मचा दिया है कोहराम.मौर्य का आरोप,पैसे लेकर टिकट देती हैं मायावती.पार्टी में टिकट की बिक्री नहीं,लगती है बोली.दरअसल ये पहला मामला नहीं है,जब मायावती पर इस तरह के आरोप लगाए गए हैं.इससे पहले बसपा के ही एक सांसद ने लगाया था कुछ इसी तरह का संगीन आरोप.आंतरिक लोगों के द्वारा लगाए जा रहे इस तरह के आरोप आम जनता की नजरों में पैदा करते है शक.बात ये भी है कि अगर पार्टी के अंदर पैसे का खेल हो रहा था,तो मौर्य ने इसकी शिकायत पहले क्यों नहीं की.चुनाव करीब आने के साथ ही इस तरह के आरोप के मायने क्या हैं.आरोप अगर पूरी तरह से निराधार हैं,तो मायावती ने स्वामी प्रसाद मौर्य पर कोई कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं की.सच्चाई जो भी हो,पर दाल में कुछ काला जरूर लगता है.अगले वर्ष उत्तरप्रदेश विधानसभा के चुनाव होने हैं.ऐसे समय में इस तरह की राजनीतिक उठा-पटक किसी भी पार्टी के लिए अच्छा नहीं हैं. .समाजवादी पार्टी में पहले से चल रही है वैचारिक मतभेद.कौमी एकता दल के विलय के उपर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने उठाया था सवाल.एकता दल के आपराधिक छवि वाले विधायक को लेकर पार्टी में मचा था घमासान.सीएम अखिलेश यादव अपनी छवि रखना चाहते हैं पाक-साफ, नहीं लेना चाहते हैं कोई रिस्क. अपनी साफ छवि का अखिलेश को पिछले विधानसभा चुनाव में मिल चुका है बड़ा फायदा.चुनाव के ऐन वक्त उत्तरप्रदेश की दो प्रमुख पार्टियों के अंदर मचे घमासान ने भाजपा-कांग्रेस के लिए खोल दी हैं राहें.भाजपा ने पिछड़े वर्ग से प्रदेश अध्यक्ष बनाकर पहले ही खेल दिया है अपना दलित कार्ड.ऐसे में बसपा का हालिया विवाद भाजपा को पहुंचा सकता है राजनीतिक फायदा.
Friday, 24 June 2016
शब्द बाण से शहमी यूपी की सियासत
उत्तरप्रेदश की राजनीति में आ गया है बड़ा भूचाल.बहुजन समाज पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव के इस्तीफे से उपजा है नया राजनीतिक विवाद.स्वामी प्रसाद मौर्य ने इस्तीफे के बाद पार्टी प्रमुख मायावती पर लगाए हैं कई संगीन आरोप.मौर्य ने मायावती को दलित की नहीं,दौलत की बेटी कहकर सियासत की दुनियां में मचा दिया है कोहराम.मौर्य का आरोप,पैसे लेकर टिकट देती हैं मायावती.पार्टी में टिकट की बिक्री नहीं,लगती है बोली.दरअसल ये पहला मामला नहीं है,जब मायावती पर इस तरह के आरोप लगाए गए हैं.इससे पहले बसपा के ही एक सांसद ने लगाया था कुछ इसी तरह का संगीन आरोप.आंतरिक लोगों के द्वारा लगाए जा रहे इस तरह के आरोप आम जनता की नजरों में पैदा करते है शक.बात ये भी है कि अगर पार्टी के अंदर पैसे का खेल हो रहा था,तो मौर्य ने इसकी शिकायत पहले क्यों नहीं की.चुनाव करीब आने के साथ ही इस तरह के आरोप के मायने क्या हैं.आरोप अगर पूरी तरह से निराधार हैं,तो मायावती ने स्वामी प्रसाद मौर्य पर कोई कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं की.सच्चाई जो भी हो,पर दाल में कुछ काला जरूर लगता है.अगले वर्ष उत्तरप्रदेश विधानसभा के चुनाव होने हैं.ऐसे समय में इस तरह की राजनीतिक उठा-पटक किसी भी पार्टी के लिए अच्छा नहीं हैं. .समाजवादी पार्टी में पहले से चल रही है वैचारिक मतभेद.कौमी एकता दल के विलय के उपर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने उठाया था सवाल.एकता दल के आपराधिक छवि वाले विधायक को लेकर पार्टी में मचा था घमासान.सीएम अखिलेश यादव अपनी छवि रखना चाहते हैं पाक-साफ, नहीं लेना चाहते हैं कोई रिस्क. अपनी साफ छवि का अखिलेश को पिछले विधानसभा चुनाव में मिल चुका है बड़ा फायदा.चुनाव के ऐन वक्त उत्तरप्रदेश की दो प्रमुख पार्टियों के अंदर मचे घमासान ने भाजपा-कांग्रेस के लिए खोल दी हैं राहें.भाजपा ने पिछड़े वर्ग से प्रदेश अध्यक्ष बनाकर पहले ही खेल दिया है अपना दलित कार्ड.ऐसे में बसपा का हालिया विवाद भाजपा को पहुंचा सकता है राजनीतिक फायदा.
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