Saturday, 16 July 2016

नौनिहालों को शिक्षा,युवाओं को रोजगार से सुलझेगा कश्मीर विवाद

हिजबुल कमांडर बुरहान वानी की मौत के बाद कश्मीर उबल रहा है.घाटी में आम जिंदगी त्रस्त हो गई है.सारे समाचार चैनलों पर लोगों के मड़ने की संख्या घट-बढ रही है.कुल मिलाकर स्थिति आसान नहीं है.बुरहान वानी का संबंध आतंकी संगठन से था.एक आतंकी से घाटी के लोगों का भावनात्मक जुड़ाव हमें सोचने पर मजबूर करता है.
कश्मीर की समस्याये दूसरे राज्यों से अलग हैं.हम इस पर तुलना नहीं कर सकते हैं.भौगोलिक,राजनीतिक व सामाजिक तमाम नजरों में यह बाकी प्रातों से अलग है.इस बात को समझना होगा.एक ही डंडे से हम सबको नहीं चला सकते हैं.
घाटी की मांगे अलग हैं.इसकी जरूरते भिन्न हैं.यहां मूल सुविधायें अभी पहुंचायी जानी शेष है.लोग मूल मांगो के लिए लड़ रहें हैं.स्थिति खराब होने के बाद वहां हॅास्पिटल जाने के लिए आर्मी की पर्मिसन लेनी पड़ती है.बाहर खुले में घुमना कई बार वहां जानलेवा होता है.यह कश्मीर की हकीकत है.निश्चित रूप से ऐसे समय में व्यक्ति की स्वतंत्रता अधूरी कही जाएगी.
आतंकी घाटी के लोगों तक अपनी पहुंच बनाना चाहते हैं.आतंकी अपने पक्ष में लोगों को करने के लिए लालच दे रहे हैं.घाटी के कुछ युवा इस चंगुल में फसते जा रहे हैं.सरकार को अपनी पहुंच प्रात के अंतिम लोगों तक सुनिश्चित करने की है.बीना इसके कोई भी प्रयास मुकम्मल नहीं होगा.
कश्मीर पर राजनीतिक दलों की राय सकारात्मक है.यह देशहित में बेहद ही अच्छा है.घाटी की समस्या का समाधान सेना व आफस्पा नहीं है.बुनियादी जरूरतों के अलावा शिक्षा व रोजगार के अवसर बढाने होंगे.कश्मीर के नौनिहाल जब पढेगें,तो उनका योगदान देश की प्रगति में होगा.वो देश तोड़ने वाली ताकतों में फर्क कर पायेंगे.रोजगार का बढाना वक्त की जरूरत है.पढे-लिखे युवाओं को जब समय पर रोजगार मिलेगा,तो देशहित में वो अपना योगदान देंगे.

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