Tuesday, 20 December 2016

संसद की कार्यवाही नहीं चल पाने से दुखी होते हैं बीजद सांसद



आमतौर पर जनता को अपने सांसदों से शिकायत रहती है कि वे लोग जनहित के पैसों का सही इस्तेमाल नहीं करते हैं.अगर आप भी इस तरह की राय रखते हैं,तो आप गलत भी हो सकते हैं.वैसे भी सभी को एक ही कोटि में नहीं रखा जाता है.बैजयंत जय पांडा.याद कर लीजिये इस नाम को.आदरणीय बीजू जनता दल(बीजद) से ओडिशा से सांसद हैं.आप कहेंगे,इन्होंने क्या कीर्तिमान स्थापित कर दिया कि हम इनका नाम याद रखें.सांसद ही तो हैं.देश में सैकड़ों हैं.तो सुन लीजिये.

सांसद महोदय देश की संसद की शीतकालीन सत्र के नहीं चल पाने से निराश हैं.जन कल्याण व नीति निर्माण के बदले संसद में हुई हंगामेबाजी का इन्हें अफ़सोस है.सरकारी खजाने के पैसे को ये जनता की अमानत मानते हैं.इनका कहना है कि इस पैसे का अधिक से अधिक खर्च लोक कल्याण में होनी चाहिये.संसद सत्र के नहीं चल पाने से इन्होंने खुद को मिलने वाली वेतन व भत्ते के एक अंश को लौटा दिया है.इन्होंने कहा कि हम सांसदों को वेतन व भत्ते जनता की कामों को करने के लिये मिलते हैं.हम अगर यह काम नहीं करते हैं,तो हमें उस पैसे को पाने का अधिकार नहीं है.आपको बता दें कि विगत चार-पांच वर्षों में जब भी सत्र नहीं चला है या बाधित रहा है,तो सांसद जी वेतन-भत्ते के कुछ भाग को सरकारी खजाने में जमा कर देते हैं.

संसद सत्र के चलने में एक बड़ी राशि खर्च होती है.सांसद बैजयंत जय पांडा को वेतन-भत्ते के रूप में मिलने वाली राशि इसका एक अंश भी नहीं है.पर इनकी कोशिश अंधेरे में चिराग जलाने जैसी है.जनता के पैसों पर ऐश की जिंदगी जीने वालों को आईना दिखाने सी है.यह जनता के पैसों का सम्मान है.यह हमारी राजनीति जिसकी भ्रष्टता की कहानी हम ज्यादा सुनते हैं,में एक उदाहरण है.आशा है.बैजयंत जी के प्रयासों का हमारे सभी माननीय अनुकरण करेंगे.सरकारी खजाने के पैसों को खुद की जागीर नहीं,जनता की समझेंगे.

Wednesday, 30 November 2016


Tuesday, 22 November 2016

यात्री सुरक्षा पर ध्यान दे रेलवे



दुर्घटना छोटी हो या बड़ी पीड़ा दायक होती है.जान-माल की क्षति होती है तुरत और उसका असर सालों-साल रहता है.जो अपने करीबी को खोते हैं जीवन भर की जुदाई दुर्घटना उन्हें समय के एक झटके में दे देती है.कोई आजीवन बिस्तर का गुलाम बन जाता है.न जाने कितने सपनों को दुर्घटना क्षत-विक्षत कर देती है.एक पल में कोई विधवा,तो ऑफिस से आने में थोड़ी देर लेट होने पर फोन कर डांट लगाने वाली अलविदा कह देती है.जिन बच्चों को माँ बाप ने बड़े होकर इंजिनियर,डॉक्टर,ऑफिसर और न जाने क्या-क्या बनने के सपने देखें थे,वो पल भर में चूर हो जाते हैं.यह दुर्घटना बहुत निर्मम होती है.ये दर्द बहुत कड़वी देती है.

कानपुर के नज़दीक हुई रेल दुर्घटना हालिया वर्षों में सबसे वीभत्स है.अभी तक 146 लोगों की जाने जा चुकी हैं,200 से अधिक लोग गंभीर रूप से जख्मी हैं.ट्रेन इंदोर से पटना जा रही थी.घटना उस वक्त हुई जब कुछ ही समय बाद एक नयी सुबह दस्तक देने वाली थी.रात के करीब तीन बज रहे थे.एक जोरदार आवाज़ आती है और उसके बाद हर तरफ़ चीख-पुकारें.ट्रेन का 14 डिब्बा पटरी से उतर जाता है.एक तरफ़ मौत की खामोशी रहती है दूसरी तरफ़ घायलों की चीत्कार.रात के घने अंधेरे में हर तरफ़ दर्द व मातम पसरा था.यात्रियों के बदन से निकलते रक्त धरती को लाल किये जा रही थीं.सब तहस नहस हो गया था.

लोग घरों में अपनों के पहुंचने का इंतज़ार कर रहे थे.पर सुबह की पहली किरण के साथ आयी ख़बर ने उन्हें मर्माहत कर दिया.फोन घनघनाने लगीं.अपनों के बारे में जानने को लोग छटपटाने लगे.न्यूज़ चैनलों पर खबरें चलने लगी.हर मिनट मरने वालों की संख्या बढ़ती ही जा रही थी,जो परिवार वालों की बेचैनी को बढ़ा रही थी.दुर्घटना को रोका नहीं जा सकता है इससे इंकार नहीं है,पर वैज्ञानिक प्रगति के साथ इसे कम ज़रूर किया जा सकता है.भारतीय रेल देश की लाइफ लाइन है.यह पुरे देश की दूरी को पाटती है.दिलों को दिलों से जोड़ती है.पर दिलों को दिल से मिलाने वाली भारतीय रेल जब लोगों को काल के गाल में झोंक दे,तो इसका जिम्मेदार कौन होगा?

हर साल रेलबजट में बड़ी-बड़ी बातें होती हैं.यात्रियों की सुरक्षा को पहली प्राथमिकता बताया जाता है.लोगों की मंगल यात्रा के लिये घोषणाओं के पूल बांध दिये जाते हैं.यकीन न हो तो रिकॉर्ड कहता है कि पुरानी घोषित योजनाओं को पुरा करने के लिये रेलवे को लाखों करोड़ रुपये की जरूरत है.पर नई घोषणायें पुरानी हो जाती हैं और जनता को लुभाने के लिये फिर नये सपने दिखाये जाते हैं.हाई स्पीड ट्रेन व वाईफाई की बातें ठीक है.यात्रियों को सुरक्षित गंतव्य तक पहुंचना पहली जरूरत है.रेल दुर्घटना का एक लम्बा इतिहास रहा है,जिसमें न जाने कितने लोगों ने अपनी जिंदगी खोई हैं.अब जब हम बुलेट ट्रेन चलाने की बात कर रहे हैं,तो यात्रा के दौरान लोग महफूज़ रहें इसपे भी काम होनी चाहिये.

मंगलयान की सफलता लोगों के जेहन में अमर हो जाये इसके लिये सरकार ने मंगलयान की तस्वीर को नोटों पे उतरवा दिया.फक्र का विषय है.किसी को कोई शिकायत नहीं है.समय की दरकार है रेलवे में भी नयी टेक्नॉलॉजी पिरोयी जाये.इसे आधुनिक बनाया क
जाये.तकनीक के सहारे रेलवे सुरक्षा को पुख्ता किया जा सकता है.सरकार लोगों के जान की कीमत को समझें और रेलवे में तकनीक का इस्तेमाल कर इसे उच्च सुरक्षा मानकों पर खड़ा करें.फिर घरों में अपनों का इंतजार करने वाले परिजनों को आशंकाओं के बादल नहीं डराएंगे.रात में यात्रा करने वाले यात्रियों को अनहोनी का डर नहीं रहेगा और वो पुरे सफर चैन की नींद ले सकेंगे.

Wednesday, 16 November 2016

बेबस आंखों को अरबसागर बनने से तत्काल रोके सरकार

आपने इंसानों की कतारें देखी हैं.देखे होंगे.सरकारी राशन की दुकनों के पास.त्योहारों के समय रेलवे टिकट काउंटर के नजदीक.मंदिर,मस्जिद,चर्च,गुरुद्वारों आदि में आस्था के लिये.और हां,कहीं कुछ अगर मुफ्त में मिल रहा हो तो उसके लिये.आपने भी लोगों के हुजूम को देखा होगा.पर ये वाली कतारें कुछ अलग प्रकृति की हैं.यहां न किसी को राशन मिल रहा है,न किसी को ईद पे घर जाने का टिकट.एग्ज़ेम में पास करवाने की दुआ मांगने वाले ये छात्रों की भी लाइनें नहीं हैं.किसी को कुछ मुफ्त भी नहीं मिल रहा है.फिर भी लोगों का ये काफिला बढ़ता ही जा रहा है.

दरअसल,देश के प्रधानमंत्री ने राष्ट्रहितकारी एक घोषणा की है.500,1000 के नोटों को अवैध घोषित कर दिया गया है.बहुत सारे तर्क दिये गए हैं.इस ऐतिहासिक निर्णय को लेते वक्त.कालाधन सामने आएगा,रखने वाले 125 करोड़ लोगों के सामने बेनकाब होंगे.आतंकवाद को पैसे से सींचने का काम बंद होगा.अर्थव्यवस्था में मनी फ्लो बढ़ने से,इसे रफ्तार मिलेगा.इतने सारे राष्ट्रोंमुखी कारण पाकर लोगों ने इस फैसले को हृदय से अंगीकार किया.पर एक दिक्कत रह गई.

लोगों को पुराने नोट बदलवाने थें.फैसला बिना पूर्व सूचना के ली गई थीं.अफरातफरी का महौल शुरू हुआ.सरकार ने 30 दिसम्बर तक 50 दिनों का वक्त मुकर्रर किया है,पर लोग 30 दिसम्बर तक का इंतजार करना नहीं चहते हैं.एटीएम व बेंकों में बढ़ती भीड़ यही कह रही हैं.लोग अपने दैनिक कामों को छोड़ पैसे बदलवाने या निकालने लाइनों में खड़े हैं.पुरे दिन लगातर लम्बी होती ये पंक्ति किसी की मज़दूरी खा रहा है.वृद्धों को बेवजह विटामिन-डी की घुटी पिला रहा है.महिलायें परेशान हैं.किचन खाली है,बेंकों में लाइन लम्बी है.

कुछ जगह से लोगों के हताहत होने की भी खबरें आ रही हैं.यह दुखद है.किसी भी व्यक्ति का जीवन कीमती है.लोगों को संयम के साथ काम लेना चाहिये.कतारों में जरुरतमंदों की मदद को हाथ आगे करना चाहिये.पर इस राष्ट्रीय महायज्ञ,जो राष्ट्र की प्रगति में कई प्रकार से मदद करेगा,उसमें अगर किसी ने अपनों को खोया है,तो उनके लिये किया.न सरकार ने अभीतक परिजनों को किसी मदद का आश्वासन दिया है,न ही कोई कथित राष्ट्रीय संस्था मदद को आगे आयी है.देशहितकारी इस काम में अपने प्राणों को भारत माता के शुभ्र आंचल में न्योछावर करने वाले उन आत्माओं के लिये अभी तक "शहीद" अलंकरण से अलंकृत करने की भी आवाजें नहीं आ रही हैं.अपने मेहनत की गाढी कमाई को पाने में,जिसे मौत को पाना पड़ा उनके लिये हम सिर्फ चुप क्यों हैं.

राष्ट्र को प्रगति के पथ पर गतिमान करने वाली किसी भी निर्णय का हम सम्मान करते हैं.हमारी आँखें भी अपने मादरे वतन को दुनिया के विकसित देशों के साथ कदमताल करते देखना चाहती हैं.हर काम को करने का एक रास्ता होता है.काम जब सवा सौ करोड़ लोगों के परिधि का हो,तो तैयारी भी भारत के क्षेत्रफल के बराबर होनी चाहिये.एक बार बेंक या एटीएम के सामने जाइये.लोगों की भीड़ को देखिये.उनकी बेबसी को महसूस कीजिये,जब पैसे हाथ में रहते हुए भी कुछ अस्पताल वाले उनके परिजनों को डिसचार्ज नहीं कर रहे हैं.लाश तक को हॉस्पिटल वाले बंधक बना लेते हैं.ये गलत हैं न ! आप ही बोलिये.इस बेबसी को ख़त्म करना होगा.लाचारों के लिये कुछ और कदम उठाने की जरूरत है,जो लोगों की आँखों को अरबसागर बनने से रोक सके

नोट-सरकार के इस निर्णय का मैं पुरे अंतर्मन से स्वागत करता हूं.

Thursday, 10 November 2016

We still very far to be in a queue of developed nation.


'mera desh badal rha hai,aage badh rha hai' this has been a slogan of our progressive economy given by PM Narendra Modi. Whenever ordinary people of our nation hear it out from the PM himself they felt,there is something taking place that has propensity to boost the economy itself.But it has been also saying in our surrounding that 'speaking is not credible than writing' and yes,it felt viable in terms of economic growth. India's rank in Ease of doing business reveals that how unfair environment is here for setting up businesses. We have been able to got 130 rank. Out neighbors Srilanka,Nepal etc did far better than us in it so far.
When business tycoons had established their plant across the world then they would come to us,because we are on 130th position for doing easy business.
Our policy makers should understand slogans are doing work in elections not in economy. nation's economy would be boosted when government will be going to make business friendly environment and it could be done when law&policy will be friendly,took less time to set up business and importantly it should be easy to acquire lands.
All these things have impact on ranking of Ease of doing business. government should centralize over these to jumped India's rank in it.when Modi administration did all this,automatically we would have been able to sought "Mera desh badal rha hai,aage badh rha hai"

Saturday, 8 October 2016

Stop misinterpretation of our belief on God


We are living in a society that made a 13 year girl to do 68days fast for ritual. Two days after completion of fast Aradhana died. According to Jain religion ritual during chaumasa period elders who has lived their life keep fast for as long. This case is sensitive when class 8 girl did it being a kind person we assume how much pain,physical and mental pressure she survived for a long time. How strong her mother and father was to see her daughter in pain and did nothing. She was in pain,was in trouble and no one was there hearing her agony. Aradhana's death shouting all this a man has little bit sentiment could hear it. Belief,worship,fast all are right in their own but when it lead to death how can we say it is right. Every religion has belief that God is there to take care of us. They give us way when we think  all ways to go has shut for me.Aradhana's death is the death of misinterpretation of our belief on God. For God sake,for the sake of humanity stop all this myths. God wish to have peace on there most loving creation(earth)don't ashamed them on the name of rituals and myth that cost life of their beloved human.

Saturday, 17 September 2016

शहादत की हो रही है अवहेलना



उसने देश की रक्षा की कसमें खायी थी.उसने वचन लिया था,भारत माता की ओर उठने वाली तमाम उँगली को झुकाने का.उसने अपनी ज़िंदगी राष्ट्र को अर्पित कर दी थी.वो मादरे वतन का सच्चा सिपाही था.

अफ़सोस!!देश का वो जाबांज अब हमारे बीच नहीं है.मात्र 21 साल की आयु में मृत्यु की शैय्या पर वो अनंत निंद्रा में सो गया.उसने देश के लिये सर्वोच्च बलिदान दिया.हम उनकी शहादत को नमन करते हैं.हम उनके अप्रतिम साहस का वंदन करते हैं.वो हमारे आदर्श हैं.

हम अपने जवानों पर गर्व करते हैं.उनकी शहादत पर आंशु बहाते हैं.नेताओं का गला रुंध जाता है.मुँह रुआंसा हो जाता है.इस दस्तूर पर सभी अपनी-अपनी कह देते हैं.पर आगे की सच्चाई बहुत कड़वी है.ये सब तमाम एक रस्म अदायगी साबित होते हैं.परिवार को मदद मिलने में सालों लग जाते हैं.सरकारी कार्यालय में परिवार वालों को बार-बार आश्वासन दिया जाता है.फिर जाने पर उन्हें दुत्कारा जाता है.

अपने बेटे के गम में तिल-तिल जीता एक पिता आज हर रोज मरता है.एक बेटा था.घर की सारी जिम्मेदारी उसके कंधों पर थी.अब वो नहीं रहा.बुढ़े बाप के लिये घर चलाना मुश्किल हो गया है.सरकारी मदद में टाल-मटोली बदस्तूर जारी है.उसके पिता आज ये भी सोचते होंगे,बेटे को सिपाही न बनने देता तो ये दिन न देखने परते.

एक माँ की रक्षा में मौत को गले लगाते वक्त उसने यही सोचा होगा,मेरी माँ का देखभाल करने,मेरे देश का 125 करोड़ बेटा उसके साथ होगा.
दुखी हूं!!उसके सोच को हमने,हमारे सिस्टम ने गलत साबित कर दिया.

Sunday, 11 September 2016

शहाबुद्दीन की रिहाई,नीतीश का होगा लिटमस टेस्ट



बिहार से एक सनसनी फैली है।चर्चा हर तरफ है।सोशल मीडिया का टाइमलाइन इस सनसनी की खबरों से सराबोर है।सबलोग लिख लेना चाहते है।अपनी भड़ास उड़ेल देना चाहते हैं।दरअसल पटना हाईकोर्ट ने बिहार के कुख्यात नेता शहाबुद्दीन को जमानत दे दिया है।शहाबुद्दीन जेल से निकल चुके हैं और अब आज़ाद हैं।इस ख़बर ने जन-मन को सकते में ला दिया है।कहीं आक्रोश है।कहीं वेदना है।कहीं ख़ुशी का माहौल व्याप्त है।

कुछ लोग न्यायिक व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं।कुछ सरकार को कोस रहें है।सच यही है,शहाबुद्दीन अब खुली आसमान के नीचे आज़ाद हैं।ये हम सबों को स्वीकारना होगा।हालांकि सरकार को कोसने वाले लोगों के अपने तर्क भी हैं।सरकार कुख्यात अपराधी को बाहर आने से रोक सकती है।ये विशेषाधिकार सरकार के पास होता है।चाहे अपराधी को कोर्ट से जमानत क्यों न मिल चुकी हो।ऐसा सरकार को कोसने वालों का कहना है।वो इस संदर्भ में बिहार के बाहुबली नेता अनंत सिंह का जिक्र करते हैं।अनंत सिंह अभी जेल में हैं।लोगों का कहना है,सरकार ने इसी कानून का उपयोग कर अनंत सिंह को जेल से बाहर आने नहीं दिया।हालांकि इस संन्दर्भ में कानूनविदों की राय ज्यादा अहम् होगी।मुझे इस पर ज्यादा नहीं कहना।

शहाबुद्दीन ने जेल से छूटते ही राज्य की सियासत में खलबली मचा दी है।नीतीश कुमार को परिस्थिति विशेष का मुख्यमंत्री बता,शहाबुद्दीन मीडिया के साथ-साथ राजनीतिक लोगों का भी ध्यान अपनी ओर खींचने में कामयाब रहे।ये सब सिर्फ खुद की गरमाई उपस्थिति दर्ज कराने का तरीका था या बिहार की राजनीति में आने वाली भूचाल की आहट,ये तो फ़िलहाल वक्त के गर्भ में है।शहाबुद्दीन के बयान के बाद आरजेडी नेता रघुवंश प्रसाद सिंह जिस तरह मुखर रूप से सामने आ रहे हैं, इसके अलग राजनीतिक मायने प्रतीत होते हैं।खैर, नीतीश कुमार ने तमाम बयानों को महत्वहीन बता,फ़िलहाल राजनीतिक अटकलों पर लगाम लगा दिया है।

बिहार में नीतीश कुमार की छवि सुशासन बाबू की है।2005 में सत्ता में आते ही नीतीश कुमार ने राज्य में कानून व्यवस्था को मज़बूत करने के लिये कई निर्णय लिए।राज्य में कानून व्यवस्था में सुधार भी आया।पर अब परिस्थिति विपरीत है।नीतीश कुमार महा गठबंधन से मुख्यमंत्री बने हैं।लालू प्रसाद यादव की पार्टी आरजेडी गठबंधन की सबसे बड़ी पार्टी है।ऐसे में नीतीश कुमार गठबंधन धर्म  से बंधे हुए हैं।शहाबुद्दीन लालू के करीबी हैं।उनका एक बड़ा क्रिमिनल रिकॉर्ड है।इस परिस्थिति में राज्य में कानून का राज बनाये रखना नीतीश के सामने बड़ी चुनौती होगी।मतलब अब होगा बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का लिटमस टेस्ट।

Friday, 2 September 2016

डिजिटल इंडिया के गोद में रिलायंस जीओ को पालने की अम्बानी चाल



रिलायंस जीओ डिजिटल इंडिया को देश में सस्ती लोकप्रियता दिलाने का है छद्म प्रयास.डिजिटल इंडिया के मूल मकसद से भटकाने की ये है एक गहरी साजिश.डिजिटल इंडिया की आड़ में कॉरपोरट को लाभ दिलाने की हो रही है कोशिश.

मोदी सरकार का विरोधी नहीं हूं.आप कुछ सोचें या बोलें उससे पहले कुछ और लिख देता हूं.
क्या मोदी सरकार ने देश की आँखों को जिस डिजिटल इंडिया का सपना दिखाया था,उसका परिणाम रिलायंस जीओ था! क्या अम्बानी के जीओ की बुनियादी पर  मोदी सरकार ने देश के हर नौनिहालों के हाथ में कंप्यूटर हों,का सपना देखा था.या यही था आमजन को टेक्नो फ्रेंडली बनाने का डिजिटल इंडिया के तहत प्रयास.

देश की एक चौताही जनता निरक्षर है.10वीं पास करने वाले आधे से अधिक बच्चे उच्च शिक्षा नहीं ले पाते हैं.ज़रूरत लोगों शाक्षर करने के साथ डिजिटल लिटरेट करने की है.डिजिटल इंडिया का मुख्य लक्ष्य भी यही होना चाहिये.इन्फ़ॉर्मेशन टेक्नॉलॉजी के इस्तेमाल से सरकारी कामों में पारदर्शिता,तीव्रता व गवर्नमेंट ऑफिस पेपरलेस हों इस मकसद से डिजिटल इंडिया का विज़न छिटकता प्रतीत होता है.

रिलायंस जीओ अम्बानी के व्यापार का निजी तत्व है.डिजिटल इंडिया के विज़न के तौर पर रिलायंस ग्रुप इसे मार्केट में प्रचारित कर रहा है.यह गलत है.कॉरपोरट व सरकार की इसमें साठगांठ नज़र आ रही है.अगर नहीं तो सरकार को इस प्रचार से तुरंत खुद को अलग करना चाहिये.

सरकारी योजना का अपना महत्व होता है.इसकी सफलता-असफलता से सरकार के कार्यकाल का मूल्यांकन होता है.ऐसे में हम सब जानते हैं,रिलायंस जीओ एक विशुद्ध प्राइवेट प्रयास है.एक प्राइवेट कंपनी घाटे की स्थिति में अपने किसी भी व्यापार को बंद कर सकती है.अगर जीओ भविष्य में असफल होता है,तो क्या डिजिटल इंडिया को असफल योजना मान लिया जाएगा!!

Saturday, 20 August 2016

ये जीत हमारे"द्रोणाचार्यों"के लगन की भी है


देश में चहुंओर ओलम्पिक की गूंज है.मेडल का इंतजार ख़त्म हो चुका है.देश की दो बेटियों ने करोड़ों अरमानों को पूरा कर दिया है.गर्व के इस स्वर्णिम क्षण को सम्पूर्ण राष्ट्र जी रहा है.सिंधु व साक्षी को पूरे देश से बधाई संदेश आ रहे हैं.भारत को अलंकृत करने वाली बेटियों पर इनामों की झड़ी लग गई है.लगनी चाहिये.इन्होंने हमारी पहचान को विश्व फलक पर प्रतिबिम्बित किया है.पर कुछ चेहरे परदे के पीछे हैं.खिलाड़ियों को हम याद करते हैं,पर उन्हें आकार देने वाले को भूल जाते हैं.खेल में प्रशिक्षक का योगदान बहुत अहम होता है.प्रशिक्षक रात में जागकर खिलाड़ियों के खेल का विश्लेषण करते हैं,तो दिन में गलतियों को सुधारने का गुरुमंत्र देते हैं.प्रशिक्षक का काम अहर्निश(दिन-रात)होता है.

"शिष्य चोटी पर चले जाते हैं,गुरु वहीं रह जाते हैं"इसमें कोई दो राय नहीं है.आज पी वी सिंधु,साक्षी मलिक,दीपा करमाकर का सितारा बुलंदियों पर है.ये नाम आज देश में नन्हें सपने को अंकुरित कर रहे हैं.न जाने कितनी आँखों में सिंधु साक्षी बनने की सोच का जागरण हुआ है.पर कहां हैं वो नाम,जिसने इन खिलाड़ियों की प्रतिभा को तराशा है.उसे ओलम्पिक जैसे विश्व मंच पर मेडल जीतने लायक बनाया है.ये कैसी परम्परा है.खेलों से लोगों का ये कैसा विचित्र प्यार है.

हमारे मेडल विजेता प्लेयरों पर पैसे की बारिश हो रही है.कोई ज़मीन दे रहा है,तो कोई नौकरी.बी एम डब्लू जैसी महँगी कारें गिफ्ट की जा रही हैं.अच्छी बात है,इससे खेलों को प्रोत्साहन मिलता है.पनपते मन को प्रेरणा मिलती है.पर खेलों का यह प्रोत्साहन अधूरा है.इस परिपाटी में गुम हैं हमारे'द्रोणाचार्य'.क्या इनामों की हो रही बारिश की एक छटा हमारे दक्ष ट्रेनरों पर नहीं होनी चाहिये?क्या उनका योगदान प्रशंसनीय नहीं है?अगर हां,तो फ़िर ये भेदभाव क्यों?इस बात को हमें समझना होगा की ट्रेनरों की अथक मेहनत का ही दूसरा नाम है"पी वी सिंधु,साक्षी मलिक,दीपा करमाकर".

देश के खेल प्रशिक्षकों के हालात अच्छे नहीं हैं.उन्हें कई समस्याओं से दो-चार होना पड़ता है.सरकारी सहायता नगण्य है.खेलों का प्रारूप बदल गया है.कोई भी गेम आज अच्छी पिच पर महंगे साजो-सामान से खेली जाती है.खेलों की इन अत्याधुनिक सामानों को जुटाना मुश्किल होता है.जिसे किसी भी तरह ट्रेनर मुहैया कराते हैं.ट्रेनरों की इस कठिन हालात को बदलना वक्त की ज़रूरत है.चीजें बदलेंगी तो ट्रेनरों का सम्पूर्ण ध्यान प्लेयरों के प्रदर्शन में सुधार पे होगा.प्रशिक्षण अच्छा मिलेगा तो अच्छे खिलाड़ियों की एक फौज खड़ी होगी.ओलम्पिक गेमों में हमें फिर पदकों के लिये टकटकी नहीं लगानी पड़ेगी

Tuesday, 16 August 2016

लापता विमान एएन-32 का अब तक कोई सुराग नहीं


एयरफोर्स का मालवाहक विमान एएन-32 पिछले  27 दिनों से लापता है.विमान में चालक दल के छह सदस्य मिलाकर कुल 35 लोग थे.जहाज चेन्नई से पोर्टब्लेयर जा रही थी.विमान के पहुँचने का इंतज़ार आज भी किया जा रहा है.अभी तक यह गुमशुदा है.

अपनों से एक दिन का विरह चुभाने वाला होता है.जुदाई पे न जाने कितने लेखकों व कवियों ने अपनी भावनाओं को उपस्थित किया है.आज देश के 35 परिवारों व उनके चाहने वालों की मानसिक पीड़ा की हम सिर्फ कल्पना कर सकते हैं.हर रोज उनके अपने ये सोच कर सो जाते होंगे कि कल कुछ पता चल जायेगा.अब तो शायद उम्मीदों पर भी उम्मीद नहीं होता होगा.वक्त जो इतने गुजर गए.

विमान को ढूंढने की पुरजोर कोशिश की जा रही है.जल,थल और वायु तीनों जगह से सर्च अभियान जारी है.मदद सेटेलाइट्स की भी ली गई है.तमाम आधुनिक यंत्रों से पता लगाने की कोशिश जारी है.तलाशी अभियान में दूसरे देशों से भी सहायता की अपील की गई है.अफ़सोस! विमान का पता आज तक नहीं चल पाया.सर्च ऑपरेशन जारी है.उम्मीदों का दीया भी जल रहा है.

कहते हैं विज्ञान ने तरक्की कर ली.जिंदगी आसान हो गई है.हर तरफ़ नवीन तकनीक की बयार है.अब तो मंगल सहित अन्य ग्रहों पर जिंदगी की भी तलाश हो रही है.कितनी रोमांचक बातें हैं.सोच के मन पुलकित हो उठता है.हकीकत देखिये.नवीन तकनीक का खोखला रुप सामने है.पिछले 27 दिनों में एक जहाज़ का पता नहीं लग पाया.किसी को कोस नहीं रहा हूं.कितने बेचारे हैं हम ये महसूस कर रहा हूं.

कुछ सवाल भी हैं.पूछा जाना जायज है.क्या उड़ान भरने से पहले विमान की जांच हुई थी.जहाज कितने वर्ष पुराना था.आखिर एयर ट्रेफिक कंट्रोल से सिग्नल टूटने का कारण क्या था.ये ऐसे सवाल हैं जिसका जवाब सरकार को देना चाहिये.विमान गुमशुदगी का लम्बा इतिहास है.हमारी बढ़ी हुई तकनीक आज भी इसे रोकने में नाकामयाब है.यह चिंता का सबब है.

Saturday, 23 July 2016

उत्तर प्रदेश में चढा सियासी पारा

देश के सबसे बड़े प्रदेश में सियासी सरगर्मी तेज हो गई है.उत्तर प्रदेश में अगले वर्ष विधान सभा चुनाव होना है.प्रदेश की राजनीति का राष्ट्रीय महत्व है.अगले लोकसभा चुनाव के मद्देनजर इसे सत्ता का सेमीफाइनल कहा जा रहा है.यूपी की बड़ी आबादी को देखते हुए यह चुनाव मोदी मैजिक के लिए भी लिटमस टेस्ट साबित होगा.
अधिकतर राज्यों में क्षेत्रीय दलों की पकड़ मजबूत होती है.यूपी की राजनीतिक स्थिति इससे थोड़ी अलग है.क्षेत्रीय दलों के अलावा यहां भाजपा व कांग्रेस पार्टी की भी राज्य में अच्छी-खासी पहुंच है.राज्य में समाजवादी पार्टी की सरकार है.अखिलेश यादव के युवा चेहरे को पिछले विधानसभा चुनाव में वहां की जनता ने सर आंखों पर रखा.
सपा,बसपा,भाजपा,कांग्रेस,आरएलडी आदि तमाम दलों ने राज्य की राजनीतिक बिसात पर खेलना शुरू कर दिया है.जातीय समीकरण बनने लगे हैं.दलित वोटरों को अपने पाले में करना सभी दलों की पहली पसंद है.हालांकि इस बार अगरी जाति को भी लुभाने की कोशिश की जा रही है.
भारतीय जनता पार्टी खुद को पार्टी विद डिफरेंस कहती है.पार्टी के सबसे मुखर नेता व देश के प्रधानमंत्री मोदी जी हर जगह विकास की बात करते हैं.70 साल से पीड़ित जनता जब विकास की बातें सुनती हैं,तो उनके सपने आकार लेने लगते हैं.उनकी सोच में एक नए भारत का चित्र प्रतिबिंबित होता है.हाल में प्रधानमंत्री जी के गोरखपुर दौरे पर भी विकास की बातें हावी रहीं.पर यूपी में भाजपा ने सबसे पहले जातिगत कार्ड खेला.बसपा के बागी केशव प्रसाद मौर्य को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर दलित वोटों को अपने पाले में करने की कोशिश की.
बसपा पार्टी की आंतरिक कलह से जूझ रही है.पार्टी से दिग्गज नेताओं का जाना बदस्तूर जारी है.बीएसपी के धाकड़ नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने पार्टी छोड़ते वक्त पार्टी प्रमुख मायावती पर कई संगीन आरोप लगाए.मौर्य ने मायावती को दलित का कहकर संबोधित किया.पार्टी की इस खींचतान से निश्चित ही जनता में गलत संदेश गया है.
हाल में भाजपा के यूपी प्रदेश उपाध्यक्ष दयाशंकर सिंह के अमर्यादित बोल ने एक नया सियासी घमासान खड़ा कर दिया.बयान पर चोतरफा विरोध के बाद भाजपा ने तुरंत सिंह को पार्टी से निकाल दिया.समाजवादी पार्टी फिर से अखिलेश यादव को आगे रखकर चुनावी समर में कूदेगी.राज्य में सपा की सरकार है.मुख्यमंत्री अखिलेश यादव अपने पांच वर्षो के काम को चुनाव में जनता के सामने रखेगी.सपा में भी धरा है,एक बुजुर्गों का व एक मुख्यमंत्री के समूह में युवाओं का.
कांग्रेस के लिए यूपी एक बड़ा मौका है खुद को फिर से स्थापित करने का.पार्टी यूपी चुनाव के महत्व को बखूबी समझ रही है.राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले प्रशांत किशोर पार्टी की चुनावी रणनीति बना रहे हैं.मोदी की ऐतिहासिक जीत हो या बिहार में भाजपा के विजय अभियान को लगा महागठबंधन रूपी ब्रेकेज,प्रशांत किशोर की रणनीति के अंदर ही ये सब हुआ.
बहरहाल,अभी चुनाव में एक वर्ष का समय शेष है.जनता को लुभाने को कुछ घोषनाएं राज्य सरकार कर सकती हैं,केन्द्र की भाजपा सरकार भी इसमें खुद को पीछे रखना नहीं चाहेगी,जिसका आगाज गोरखपुर से मोदी कर चुके हैं.आज की जनता बेहद समझदार है.वो चुनावी वर्ष में राजनीतिक दलों के हर खेल को समझती है.राजनीतिक दल चाहें जितना भी समीकरण बना लें या जातीय कार्ड खेल लें,जनता का परिणाम तो पांच वर्षो के काम पर ही आएगा.

Saturday, 16 July 2016

नौनिहालों को शिक्षा,युवाओं को रोजगार से सुलझेगा कश्मीर विवाद

हिजबुल कमांडर बुरहान वानी की मौत के बाद कश्मीर उबल रहा है.घाटी में आम जिंदगी त्रस्त हो गई है.सारे समाचार चैनलों पर लोगों के मड़ने की संख्या घट-बढ रही है.कुल मिलाकर स्थिति आसान नहीं है.बुरहान वानी का संबंध आतंकी संगठन से था.एक आतंकी से घाटी के लोगों का भावनात्मक जुड़ाव हमें सोचने पर मजबूर करता है.
कश्मीर की समस्याये दूसरे राज्यों से अलग हैं.हम इस पर तुलना नहीं कर सकते हैं.भौगोलिक,राजनीतिक व सामाजिक तमाम नजरों में यह बाकी प्रातों से अलग है.इस बात को समझना होगा.एक ही डंडे से हम सबको नहीं चला सकते हैं.
घाटी की मांगे अलग हैं.इसकी जरूरते भिन्न हैं.यहां मूल सुविधायें अभी पहुंचायी जानी शेष है.लोग मूल मांगो के लिए लड़ रहें हैं.स्थिति खराब होने के बाद वहां हॅास्पिटल जाने के लिए आर्मी की पर्मिसन लेनी पड़ती है.बाहर खुले में घुमना कई बार वहां जानलेवा होता है.यह कश्मीर की हकीकत है.निश्चित रूप से ऐसे समय में व्यक्ति की स्वतंत्रता अधूरी कही जाएगी.
आतंकी घाटी के लोगों तक अपनी पहुंच बनाना चाहते हैं.आतंकी अपने पक्ष में लोगों को करने के लिए लालच दे रहे हैं.घाटी के कुछ युवा इस चंगुल में फसते जा रहे हैं.सरकार को अपनी पहुंच प्रात के अंतिम लोगों तक सुनिश्चित करने की है.बीना इसके कोई भी प्रयास मुकम्मल नहीं होगा.
कश्मीर पर राजनीतिक दलों की राय सकारात्मक है.यह देशहित में बेहद ही अच्छा है.घाटी की समस्या का समाधान सेना व आफस्पा नहीं है.बुनियादी जरूरतों के अलावा शिक्षा व रोजगार के अवसर बढाने होंगे.कश्मीर के नौनिहाल जब पढेगें,तो उनका योगदान देश की प्रगति में होगा.वो देश तोड़ने वाली ताकतों में फर्क कर पायेंगे.रोजगार का बढाना वक्त की जरूरत है.पढे-लिखे युवाओं को जब समय पर रोजगार मिलेगा,तो देशहित में वो अपना योगदान देंगे.

Friday, 15 July 2016

एमटीसीआर पर भारत की राह देखेगा चीन

भारत परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह का सदस्य नहीं बन पाया है.दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल में हुई बैठक भारत के लिए बेनतिजा रही.भारत अपनी मांग पर एकराय बनाने में नाकामयाब रहा.हालांकि अधिकतर देश भारत के पक्ष में थे.चीन के अंततः ना ने हिन्दुस्तान के मंसूबे पर पानी फेर दिया.
एनएसजी परमाणु आपर्तिकर्ता देशों का एक समूह है.इसके सदस्य देश आपस में व्यापार साझा करते हैं.टेक्नोलॉजी सहित यूरेनियम मिलने में सदस्य देशों को आसानी होती है.इन्हीं चीजों के मद्देनजर भारत ने सदस्यता की मांग की थी.लेकिन भारत कामयाब नहीं रहा.
चीन ने भारत का विरोध किया.दलील दी,भारत ने एनपीए यानी परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर नहीं किया है.बिना इसके परमाणु संसाधन का दुरूपयोग हो सकता है.चीन की ये शर्त बेबुनियाद मालूम पड़ती है.एनएसजी ग्रुप के कई देशों ने एनपीए साइन नहीं किया है.फिर भारत के मामले में ये नया पेंतरा क्यों?
बड़ा दिलचस्प है.चीन ने पाकिस्तान को एनएसजी सदस्य बनाये जाने की मांग की है.चीन ने कहा कि अगर भारत सदस्य बनता है,तो फिर पाकिस्तान भी बनना चाहिये.इसे चीन की मूर्खता कहें या पाक के प्रति दीवानापन.पाकिस्तान कागज पर लोकतांत्रिक देश है.हर दिन,हर क्षण वहां लोकतंत्र की हत्या होती है.यह सिर्फ हम नहीं सारा संसार कहता है.हां.चीन इससे असहमत हो सकता है.
विरोध एक नैसर्गिक प्रक्रिया है,होनी चाहिये.पर उसका एक मजबूत आघार होना जरूरी है.बिना तर्क का विरोध ईर्ष्या या द्वेष ही मालूम पड़ता है.चीन का विरोध कुछ ऐसा ही लगता है.भारत एक जिम्मेदार राष्ट्र है.विश्व में भारत की छवि एक शांतिप्रिय देश की है.चीन ने न सिर्फ इसे नजरदांज किया है,बल्कि अन्य देशों के भारत पर विश्वास को झूठलाया है.
भारत एनएसजी देशों को मिलने वाली सुविधायें नो साल पहले से उठा रहा है.2008 में अमेरिका के साथ हुए संधि के साथ ही भारत को परमाणु सुविधायें मिलने लगी थी..चीन ने इसे भी नहीं देखा.भारत की ये मांग विश्व मंच पर सिर्फ अपनी उपस्थिति से थी.
एनएसजी पर कूटनीतिक असफलता ने देश में विपक्ष को एक मुद्दा दे दिया है.विपक्ष ने इसे विश्व मंच पर भारत की पराजय बताया है.कुछ नेताओं का कहना है की प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की प्रतिष्ठा का अवमूल्यन किया है.हालांकि वाद-विवाद लोकतंत्र की खूबसूरति है.कूटनीति कि सफलता-असफलता कभी हार-जीत का विषय नहीं होता.ये आमजन को ध्यान रखना होगा.
भारतीयों के लिए एक खुशी का कारण है.भारत एमटीसीआर यानी मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रिजीम का का सदस्य बन गया है.भारत अब छोटे मिसाइल व टेक्नोल़ॉजी सदस्य देश को बेच सकेगा.भारतीय रक्षा क्षेत्र के व्यापार में यह बड़ी भूमिका अदा करेगा.बड़ी बात ये है कि भारत को ये कामयाबी पहली बार में ही मिली है.
एमटीसीआर में भारत की सदस्यता ने एक रोचकता को जन्म दिया है.चीन ने एनएसजी पर भारत का विरोध किया है.भारत को निराशा भी इसी विरोध से मिली है.अब एक दांव भारत के हाथ में भी है.भारत अब एमटीसीआर का सदस्य देश है.चीन ने अपनी सदस्यता अर्जी 2004 में ही लगाई थी.चीन आज तक इसका सदस्य नहीं बन पाया.समूह देश में चीन के ऊपर सहमति नहीं बन पाई.अब सदस्य देशों में नया नाम भारत का है.यानी एनएसजी पर चीन की हां से ही एमटीसीआर पर भारत की हां का रास्ता खोलेगा.है न रोचक!

Sunday, 26 June 2016

आपातकाल लोकतंत्र के लिए काला अध्याय


प्रधानमंत्री ने देश से आज 21वें बार मन की बात की.मन की बात में पीएम ने टैक्स चोरी करने वालों को चेतावनी भी दी.पीएम ने कहां कि देश के नागरिक चोर नहीं हैं.जिन लोगों के भी पास बेनामी सम्पति है,वे उसका खुलासा करें.सरकार ने 30 सितम्बर तक का वक्त सबों के लिए मुकर्रर किया हैं.ऐसा नहीं करने वालों को बाद में बक्शा नहीं जाएगा.देश की तरक्की सबों के सम्यक प्रयास से होती है.125 करोड़ के हमारे देश में आज सिर्फ 1.5 लाख लोग टैक्स अदा करते हैं.यह हमारे लिए चिंता की बात है.ऐसा नहीं है कि देश में अधिक पैसे वाले लोग कम है.आपको ऐसे लोग अपने आस-पास भी मिल जाएंगे.जिनके पास करोड़ों का बंगला है.महंगी-महंगी गाड़ियों का काफिला है.फिर भी ऐसे कुछ लोग सरकार को टैक्स नहीं देते हैं.जिससे सरकारी खजाने को नुकसान होता है.आपातकाल का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने इसे लोकतंत्र का काला समय बताया.हाल ही में एयरफोर्स में शामिल हुई देश की तीन बेटियों को पीएम ने शुभकामनाएं दी.उन्होंने कहा कि आज बेटियां हर क्षेत्र में आगे बढ रही हैं.समाज को इस बदलाव का मानस बनाना चाहिये.
इसरो की सफलता देश के लिए गर्व का विषय है.हमारे वैज्ञानिकों ने
अपनी प्रतिभा से देश का मस्तक ऊंचा किया है.बता दे कि,एक ही दिन में 20 उपग्रह प्रेक्षपित करके भारत ने अपने ही 2008 के रिकॉ़र्ड को को तोड़ दिया है.प्रेक्षपित 20 सेटेलाइट्स में 17 विदेश के थे.अमेरिका,कनाडा जैसे समृद्ध देशों ने हमसे अपना उपग्रह लांच करवाया है.यह छोटी बात नहीं है.इसरो की तकनीक सस्ती है.हम दुनियां से 10 गुना कम लागत पर उपग्रह लांच करते हैं.आज विकसित देश हमसे लांचिंग करवाते हैं,तो इसके पीछे ये एक बड़ी वजह है.
पीएम ने किसानों को अच्छी मॉनसून की शुभकानाएं भी दी.योग के ऊपर उन्होंने कहा कि सम्पूर्ण विश्व ने बड़ी ही सादगी के साथ योग मनाया है.यह हमारी विरासत है.दुनियां योग के रंग में रंग गई थी.विश्व योग दिवस से भारत की विरासत को संसार की नजरों में नया आयाम मिला है.

Friday, 24 June 2016

शब्द बाण से शहमी यूपी की सियासत


उत्तरप्रेदश की राजनीति में आ गया है बड़ा भूचाल.बहुजन समाज पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव के इस्तीफे से उपजा है नया राजनीतिक विवाद.स्वामी प्रसाद मौर्य ने इस्तीफे के बाद पार्टी प्रमुख मायावती पर लगाए हैं कई संगीन आरोप.मौर्य ने मायावती को दलित की नहीं,दौलत की बेटी कहकर सियासत की दुनियां में मचा दिया है कोहराम.मौर्य का आरोप,पैसे लेकर टिकट देती हैं मायावती.पार्टी में टिकट की बिक्री नहीं,लगती है बोली.दरअसल ये पहला मामला नहीं है,जब मायावती पर इस तरह के आरोप लगाए गए हैं.इससे पहले बसपा के ही एक सांसद ने लगाया था कुछ इसी तरह का संगीन आरोप.आंतरिक लोगों के द्वारा लगाए जा रहे इस तरह के आरोप आम जनता की नजरों में पैदा करते है शक.बात ये भी है कि अगर पार्टी के अंदर पैसे का खेल हो रहा था,तो मौर्य ने इसकी शिकायत पहले क्यों नहीं की.चुनाव करीब आने के साथ ही इस तरह के आरोप के मायने क्या हैं.आरोप अगर पूरी तरह से निराधार हैं,तो मायावती ने स्वामी प्रसाद मौर्य पर कोई कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं की.सच्चाई जो भी हो,पर दाल में कुछ काला जरूर लगता है.अगले वर्ष उत्तरप्रदेश विधानसभा के चुनाव होने हैं.ऐसे समय में इस तरह की राजनीतिक उठा-पटक किसी भी पार्टी के लिए अच्छा नहीं हैं. .समाजवादी पार्टी में पहले से चल रही है वैचारिक मतभेद.कौमी एकता दल के विलय के उपर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने उठाया था सवाल.एकता दल के आपराधिक छवि वाले विधायक को लेकर पार्टी में मचा था घमासान.सीएम अखिलेश यादव अपनी छवि रखना चाहते हैं पाक-साफ, नहीं लेना चाहते हैं कोई रिस्क. अपनी साफ छवि का अखिलेश को पिछले विधानसभा चुनाव में मिल चुका है बड़ा फायदा.चुनाव के ऐन वक्त उत्तरप्रदेश की दो प्रमुख पार्टियों के अंदर मचे घमासान ने भाजपा-कांग्रेस के लिए खोल दी हैं राहें.भाजपा ने पिछड़े वर्ग से प्रदेश अध्यक्ष बनाकर पहले ही खेल दिया है अपना दलित कार्ड.ऐसे में बसपा का हालिया विवाद भाजपा को पहुंचा सकता है राजनीतिक फायदा.

Thursday, 23 June 2016

विश्व ने माना हमारी तकनीक का लोहा


भारत ने एक बार फिर विश्व फलक पर अपनी पहचान बनाई है.दुनियां ने फिर भारत की काबिलियत का लौहा माना है.इस बार धरती पे नहीं,बल्कि आसमान में भारत ने अपनी पहचान छोड़ी है.भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन की इस सफलता से आज सारा देश गदगद है.बैलगाड़ी से अपनी यात्रा शुरू करने वाली इसरो का ये दुनियां को दहार है.इसरो के जरिए भारत ने दुनियां को संदेश दिया है कि हम पीछे रहकर नहीं,कदम से कदम मिलाकर फासला तय करेंगे.दरअसल इसरो ने एक ही दिन में 20 सेटेलाइटस लांचकर बड़ी कामयाबी हासिल की है.इससे पहले 2008 में इसरो ने एक दिन में सर्वाधिक 10 उपग्रह प्रेक्षपित किया था.अंतरिक्ष विज्ञान में अब हमारा कोई जोड़ नहीं.हमारे पड़ोसी तो रेस में भी नहीं हैं.कनाडा और अमेरिका जैसे देश हमसे उपग्रह प्रेक्षपित कराने को लालायित हैं.हमारी सस्ती तकनीक ने दुनियां को हमारी ओर झुकने पे बेबस कर दिया है.विकसित देशों का हमसे उपग्रह लांच करवाना इसे सिद्ध करता है.उपग्रह प्रेक्षपन में अब सिर्फ रूस और अमेरिका ही हमसे आगे हैं.रूस ने अभी एक दिन में सबसे अधिक 33 सेटेलाइटस लांच करने का रिकॉर्ड अपने नाम कर रखा है.व्यवसाय की दृष्टि से इसरो की ये बड़ी कामयाबी है.अंतरिक्ष कारोबार में भारत को ये नई दिशा देगा.अभी अंतरिक्ष कारोबार में भारत की सिर्फ चार फीसदी हिस्सेदारी है.41 फीसदी के साथ अमेरिका पहले पायदान पर है.

Wednesday, 22 June 2016

कैसे होगें विकसित,आधी आबादी है व्यथित


ये चीख कोई सुनता क्यों नहीं
देश की आधी आबादी की कसक को सुनिये
अपने देश की खौफनाक सच्चाई को जान आप भी कांप उठेंगे.
महिलाओं के संसार की ये दर्दनाक कहानी है.
ये उस धरती की हकीकत है,जहां एक द्रोपदी
की चीरहरण पर धर्मयुद्ध महाभारत हो
है जाता.
हमारा देश जो कि नारियों की इज्जत व सम्मान के लिए जाना जाता है,ये वहां की तस्वीर है.
हमारा देश तो अपनी विराट सभ्यता व संस्कृति के लिए जाना जाता है,फिर ये क्या...हमारे तो ग्रंथों में भी लिखा है,यत्र नार्यस्तु पुज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता अर्थात जहां नारियों की पूजा होती है,वहां देवता निवास करते हैं.पर हम तो अपनी समाजिक विरासत ही भूल गए.
कितना खूंखार हो गया है हमारा समाज,इसकी एक बानगी देखिये
देश की 70 फीसदी महिलाये पारिवारिक कलह से जूझ रही हैं.ये आंकड़ा उन महिलओं का जिन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया है.
हर 9 मिनट में एक औरत को उसके पति या रिश्तेदार द्वारा प्रताड़ित किया जाता है.
प्रत्येक 29 मिनट बाद भारत में एक महिला बलात्कार पीड़ित हो जाती हैं.
दहेज जैसे अमानवीय मांग को लेकर हर 77 मिनट में एक महिला का हत्या कर दी जाती है.
आपके तन-मन में अगर अभी भी भूचाल नहीं आया है,तो और सुनिये
देश में हर दो मिनट के अंदर महिलाओं के खिलाफ जुर्म की एक वारदात हो रही है.
पिछले एक दशक में देश में महिलओं के खिलाफ जुर्म की संख्या दोगुणी हो गई है.